चितौड़ के निम्बाहेडा तहसील के गादोला गांव की है ये कहानी
जयपुर। देशभर में कोरोना को लेकर पैनिक के हालातों के बीच राजस्थान के एक गांव से ऐसी खबर निकालकर आई कि ग्रामीणों ने मिलकर अपने दमखम पर कोरोना से जंग जीत पूरे गांव को कोविड फ्र्री कर डाला। सरकार ने तो सम्पूर्ण लॉक डाउन को लेकर अब फैसला किया है पर चितौड़ जिले की निम्बाहेड़ा तहसील के गादोला गांव ने तो पहले ही अपने स्तर पर दस दिन का सम्पूर्ण लॉकडाउन लगा कोरोना से जंग जीत ली। शुरू में अपनों को खोया भी बहुत पर अब पूरा गांव स्वस्थ हैं। एक महिला सरपंच रसीला देवी की अगुवाई में ग्रामीणों ने आखिर जंग जीत ही ली।
दस दिन का सम्पूर्ण लॉक डाउन से बनी बात
चार हजार की आबादी वाले गादोला गांव में 13 अप्रैल को पहला कोरोना केस आया और उसके बाद कोरोना ने ऐसा कहर ढाया कि एक के बाद एक 25 मौते हो गई। पूरा गांव भयभीत था। पॉजिटिव आने पर क्वारंटाइन के डर से लोग सेम्पलिंग करवाने तक को तैयार नहीं थे। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए सरपंच रसीला देवी और उनके पति देवीलाल ने गांव के ही प्रतिष्ठित लोगों की एक टीम बनाई तथा पूरे गांव को 23 अप्रैल से दस दिनों तक के लिए लॉक डाउन लगा डाला। गांव की पूरी सीमा सील कर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया।
गांव वालो ने यूँ किया कोविड फ्री
इस बीच स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन को सूचित कर लोगों को समझाकर डोर टू डोर सेम्पलिंग करवाई तथा गांव की ही एक सरकारी स्कूल में पॉजिटिव आये 87 लोगों को आइसोलेटेड किया गया। गांव के लोगों ने न केवल अपने स्तर पर लॉक डाउन लगाया बल्कि कोरोना गाइड लाइन की अक्षरश: पालना करवाई उसका परिणाम ये निकला कि पूरा गांव कोरोना से मुक्त हो गया।
अपनो को खोने का गम पर ख़ुशी कोविड फ्री की
सरपंच पति देवीलाल के अनुसार गांव के कोविड फ्री होने के बावजूद गांव की हमारी टीम एतिहातन सतर्कता बरत रही हैं ताकि कोरोना गांव में फिर से दस्तक ना दे सके। सरपंच रसीला देवी के अनुसार हमें अपने 25 जनों के कोविड का शिकार हो दुनियां से चले जाने का गम तो है,लेकिन समय रहते बाकी पूरे गांव को कोरोना से मुक्त कराने का संतोष भी हैं। अगर सम्पूर्ण लॉकडाउन का कड़ा फैसला नहीं करते तो पता नहीं कितने लोग कोरोना के काल में समा कालग्रस्त हो जाते।
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