इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई दशकों बाद गजकेसरी और पंचग्राही योग का अद्भुत संयोग

लेखक : नीति गोपेंद्र भट्ट

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इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई दशकों बाद गजकेसरी और पंचग्राही योग का अद्भुत संयोग

महाशिवरात्रि पर इस वर्ष कई दशकों बाद गजकेसरी और पंचग्राही योग का अद्भुत संयोग है। इस विशेषसंयोग में भोलेनाथ का अभिषेक करने से विशेष फल मिलेगा। सबसे खास बात यह रहेगी कि कोरोना संक्रमणथमने से इस बार मंदिरों और शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर रहें है । इस विशेष पर्व कोलेकर विशेष आयोजनों की तैयारियां की गई हैं।

राजस्थान के कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी के अनुसारइस वर्ष कई दशकों बाद महाशिवरात्रि विशेष योग-संयोग लेकर आई है। इस बार महाशिवरात्रि धनिष्ठा नक्षत्रमें कुमार योग, परिघ योग, सिद्धि योग व शिव के साथ गजकेसरी योग में मनाई जा रही है ।

ज्योतिषाचार्य डॉ तिवारी के अनुसार वर्षों बाद इस तरह के योग निर्मित हुए हैं। मंगलवार को शाम 4. 31 केबाद गजकेसरी महायोग भी बन रहा है, जो महाशिवरात्रि को खास बना रहा हैं। इस योग में की गई पूजा कासाधक को कई गुणा अधिक फल मिलेगा। इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से कालसर्प योग के दोष काप्रभाव कम होगा।

फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, जो इस बार एक मार्च को मनाई जा रही है। चतुर्दशी मंगलवार धनिष्ठा नक्षत्र और शिव योग के साथ गजकेसरी नामक दुर्लभ संयोग होने से इसे विशेषफलदायी बता रहे हैं। शिवरात्रि को निराकार रूप को साकार करके शिवलिंग के रूप में प्राकाट्य होने का दिन भी माना जाता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में नंदी पर वास करते हैं। अत: इस दिनजलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन आदि से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। भक्तों की सभी प्रकार की अभिष्टमनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारीके अनुसार इस वर्ष कई दशकों बाद महाशिवरात्रि विशेष योग-संयोग लेकर आ रही है।

इस बार महाशिवरात्रि धनिष्ठा नक्षत्र में कुमार योग, परिघ योग, सिद्धि योग व शिव के साथ गजकेसरी योग मेंमनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ तिवारी के अनुसार वर्षों बाद इस तरह के योग निर्मित हुए हैं। इसलिए इसशिवरात्रि पर भोलेनाथ की आराधना का महत्व कई गुणा अधिक बढ़ गया है। इस शिवरात्रि पर पूजा-अर्चनाकरने एवं व्रत रखने वाले भक्तों पर भोले बाबा असीम कृपा बरसाएंगे। भक्त शिवजी का गन्ने का रस, दूध, गंगाजल सहित पंचामृत से अभिषेक कर बील्व पत्र, बेर, मोगरी, गाजर, आंक-धतुरा, भांग इत्यादि अर्पित करसुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

पूजा का विशेष समय

चतुर्दशी तिथि मंगलवार रात एक बजे तक रहेगी। इस लिए महाशिवरात्रि का पर्व शिव की तिथि फाल्गुन कृष्णचतुर्दशी धनिष्ठा नक्षत्र में कुमार योग, परिघ योग, सिद्धि योग व शिव के साथ गजकेसरी योग में मनाई जा रहीहै। शाम 4. 31 के बाद गजकेसरी महायोग बन रहा है, जो महाशिवरात्रि को खास बना रहा हैं। इस योग में कीगई पूजा का साधक को कई गुणा अधिक फल मिलेगा। इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से कालसर्पयोग के दोष का प्रभाव कम होगा। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और भोलेनाथ ने वैराग्यजीवन त्याग कर गृहस्थ जीवन अपनाया था। इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

चार प्रहर की पूजा का समय 

यदि शिवरात्रि को चार प्रहर में चार बार पूजा करें, तो इसका विशेष फल मिलता है।मंगलवार की रात्रि में निशिथ काल में 50 मिनट तक सर्वश्रेष्ठ शुभ समय है। निशिथ काल की पूजा रात्रि12.14 से लेकर एक बजकर चार मिनट तक है। प्रथम प्रहर-शाम 6.24 से रात्रि 9.29 बजे तक, द्वितीय प्रहररात्रि 9.29 से 12.35 बजे तक, तृतीय प्रहर- 12.35 से 3.37 बजे तक, चतुर्थ प्रहर -3.37 से सुबह 6.54 बजेतक है।

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