नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक हालात के मद्देनजर केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को रोक रखा है। सरकार ने जनवरी 2020 से महंगाई भत्ता (7th Pay Commission) रोक दिया था। यह रोक जून 2021 तक है।
17 से 28 फीसदी हो सकता है डीए
जनवरी 2020 में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए चार फीसदी बढ़ा था। इसके बाद दूसरी छमाही (जून 2020) में इसमें तीन फीसदी का इजाफा हुआ। अब जनवरी 2021 में यह चार फीसदी बढ़ा है। इस तरह डीए 17 फीसदी से बढ़कर 28 फीसदी होने से कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि सरकार ने पिछले साल जनवरी से ही इसमें रोक लगाई हुई है।
पीएफ बैलेंस में भी होगी बढ़ोतरी
पीएफ का कैलकुलेशन हमेशा वेतन और महंगाई भत्ते को जोड़कर किया जाता है। इसलिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से पीएफ बैलेंस में भी बढ़ोतरी होगी। डीए में बढ़ोतरी से केंद्रीय कर्मचारियों की डीए, एचआरए, ट्रेवल अलाउंस (TA) और मेडिकल अलाउंस सीधे तौर पर प्रभावित होगा। डीए 17 फीसदी से बढ़कर 28 फीसदी होने से न केवल केंद्रीय कर्मचारी की सैलरी में बढ़ोतरी होगी बल्कि इससे पीएफ में उनका योगदान भी बढ़ेगा।
जून 2021 तक फ्रीज है महंगाई भत्ता
पूर्व कर्मचारियों को भी डीआर बेनिफिट्स पर लगी रोक हटाए जाने का बेसब्री से इंतजार है। सरकार ने जून 2021 तक डीए और डीआर फ्रीज कर रखा है। अगर जुलाई में डीए और डीआर बहाल होता है तो इसका फायदा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों को होगा। ऐसे में अगर महंगाई भत्ता बहाल होता है तो लगभग 58 लाख पेंशनर्स को इसका फायदा मिलेगा।
क्या है महंगाई भत्ता?
मालूम हो कि महंगाई भत्ता वेतन का एक हिस्सा है। यह कर्मचारी के मूल वेतन का एक निश्चित फीसदी होता है। देश में महंगाई के असर को कम करने के लिए सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान करती है। इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता है। रिटायर कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलता है।
