Movie Review: सरदार का ग्रांडसन
लेखक: अनुजा चौहान, अमितोष नागपाल, काशवी नायर
कलाकार: नीना गुप्ता, अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंह, कंवलजीत सिंह, कुमुद मिश्रा और जॉन अब्राहम व अदिति राव हैदरी (विशेष भूमिकाओं में)
निर्देशक: काशवी नायर
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: **
नीना गुप्ता खुश हैं कि आखिरकार किसी निर्देशक ने तो उन्हें टाइटल रोल में लेकर फिल्म बनाई। युवाओं से भरे देश भारत में बुजुर्गों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। पिछली जनगणना में ही इनकी तादाद 10 करोड़ से ऊपर थी। अब नई जनगणना के आंकड़े आएंगे तो इनमें उल्लेखनीय और सुखद वृद्धि दिखनी है। हमारे आसपास आशीर्वाद देने के लिए इतने बुजुर्ग देश में पहले कभी नहीं थे। काशवी को भी अपनी फिल्म का विचार उस वृत्तचित्र से मिला जिसमें एक शख़्स आज़ादी की 70वीं सालगिरह पर सरहद पार जाकर अपनी पुरानी यादों की उस पार छूट गई गठरी टटोलना चाहता है। वह खुद अपने दादाजी को लेकर मुंबई से जामनगर स्थित उनके गांव गईं तो वे एहसास इस फिल्म की नींव बने।
मुंबइया फिल्म इंडस्ट्री के अगुवा इन दिनों देशी रिश्तों की डोर छोड़कर ना जाने कौन कौन सी दास्तान बना रहे हैं तो ऐसे में विदेश में पढ़ी लिखी एक लड़की ‘सरदार का ग्रांडसन’ बना रही है, यही नया भारत है।

फिल्म ‘सरदार का ग्रांडसन’ की पहली पहली खबरें जिन दिनों आईं थी तो कोरोना का प्रकोप महामारी बनकर फैलने की किसी ने सोच भी नहीं रखी थी। फिर बीते डेढ़ साल से दुनिया को परिवार का मतलब समझ आया है। समझ आया है कि दफ्तर से घर आकर घंटा आधा घंटा परिवार के साथ टीवी देख लेना, साथ बैठकर खाना खा लेना या संडे के संडे साथ में पिक्चर देख लेना ही फैमिली फीलिंग नहीं है। परिवार को लेकर लोगों की जो सोच पिछले महीनों में बदली है, उसकी टॉपिंग है फिल्म ‘सरदार का ग्रांडसन’।

ये सच है कि किसी अनुभवी निर्देशक के हाथों में जाकर ये फिल्म एक ऑल टाइम क्लासिक बन सकती थी, लेकिन तारीफ काशवी की करनी होगी कि उन्होंने एक जटिल विषय को बहुत ही सहजता के साथ दर्शकों के सामने रखा। उनकी अनुभवहीनता ही इस फिल्म को असली बनाए रखती है, एहसासों का नकलीपन यहां नहीं है और ना ही भावनाओं का सैलाब।

फिल्म ‘सरदार का ग्रांडसन’ में नीना गुप्ता ने कमाल का काम किया है। फिल्म ‘बधाई हो’ से हिंदी सिनेमा में दोबारा धमाकेदार एंट्री करने वाली नीना गुप्ता को मलाल रहा है कि उनके समय के निर्देशकों ने उन्हें किसी फिल्म में हीरोइन तक नहीं बनाया। यहां उनसे दो पीढ़ी के अंतर पर खड़ी एक नई निर्देशक ने उन्हें फिल्म का टाइटल रोल दे दिया है। 90 साल का दिखने के लिए नीना गुप्ता को प्रोस्थेटिक मेकअप भी कराना पड़ा है, पर वह उसमें भी सुंदर ही दिखती हैं। पूरे परिवार के साथ उनका रिश्ता निभाना कहानी की असली कड़ी है।

उनके बाद फिल्म में किसी का काम दमदार है तो वह हैं अदिति राव हैदरी। सरदार कौर कोई 74 साल पहले की। अदिति ने युवा सरदार कौर के रोल में बेहतरीन अभिनय किया है। यूं लगता है कि जैसे किसी ठेठ पंजाबन युवती ने ही ये किरदार निभाया है।

फिल्म का सबसे हिट गाना ‘मैं तेरी हो गइयां, मैंनूं दूर न करीं’ उन पर और जॉन पर फिल्माया गया है। मिलिंद गाबा के चार साल पुराने इस गाने को फिल्म में शामिल करके टी सीरीज ने नेक काम किया है।
