स्टेशनरी लेने बहरोड़ जा रहे बाइक सवार तीन स्टूडेंट्स की ट्रेलर से टक्कर, दो की मौत

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बहरोड़ (अलवर) : अलवर के बहरोड़ कस्बे में दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर परिवहन कार्यालय के सामने सुबह 9 बजे सड़क पर खड़े ट्रेलर में बाइक घुस गई। इस दर्दनाक हादसे में बाइक पर सवार 12वीं क्लास में पढ़ने वाले तीन दोस्तों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों दोस्त गांव गंडाला के रहने वाले थे। बाइक सवार तीनों छात्रों ने हेलमेट नहीं लगाया था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तीनों को बहरोड़ के राजकीय अस्पताल पहुंचाया। जहां दो छात्रों को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों के शव मॉर्च्यूरी में रखवाए गए हैं। घायल छात्र का इलाज जारी है। बाइक इतनी स्पीड में थी कि ट्रक में घुसने के बाद आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया। हादसे की सूचना के बाद बड़ी में संख्या में परिजन और ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। हादसे की सूचना के बाद बहरोड़ एसडीएम सचिन कुमार यादव, CBEO शशि कपूर, स्कूल प्रिंसिपल वीरप्रभा यादव सहित प्रशासनिक, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बताया कि गांव में घर से स्कूल की दूरी लगभग 1 किलोमीटर है और घटना स्थल स्कूल से करीब 12 किलोमीटर है। बहरोड़ पहुंचने ही वाले थे कि एक्सीडेंट हो गया।

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तीनों 12वीं क्लास के स्टूडेंट

हर्ष और अमित सुबह 7 बजे घर से निकले थे। तीसरा दोस्त माजरी कला से बस में सवार होकर गांव गंडाला पहुंचा था। हर्ष अपने चाचा सतपाल की बाइक लेकर आया था। यहां से तीनों बाइक पर सवार होकर स्कूल जाने के बजाय बहरोड़ के लिए रवाना हो गए। मृतक हर्ष (16) पुत्र महिपाल यादव और अमित कुमार (16) पुत्र अनिल मेघवाल दोनों बहरोड़ तहसील के गांव गंडाला के रहने वाले थे। वहीं घायल चेतन (16) पुत्र ग्यारसी लाल माजरी कला गांव का रहने वाला है। तीनों से घर से स्कूल जाने के लिए कहकर निकले थे, लेकिन स्कूल नहीं जाकर बहरोड़ से स्टेशनरी का सामान लेने बहरोड़ जा रहे थे।​​​​ गंडाला के रामरतन जोशी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रिंसिपल वीर प्रभा ने बताया कि तीनों आज स्कूल नहीं आए। तीनों 12वीं क्लास के स्टूडेंट हैं और पढ़ाई में भी ठीक थे।

मृतक हर्ष और अमित अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। हर्ष के पिता के कुछ वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। उसके कोई दूसरा भाई ओर बहन भी नहीं है, वह मां का इकलौता सहारा था। मृतक अमित के पिता मजदूरी करते हैं, माता गृहणी है और वह भी माता-पिता का इकलौता सहारा था।

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