जालोर/जोधपुर। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक परंपराओं में, हमारे पुराणों में और हमारे ऋषि-मुनियों ने श्लोकों में गौमाता की महिमा का प्रभुत्व के साथ वर्णन किया है। स्कन्द पुराण में लिखा है कि वेद गोमयी है और गौमाता देवमयी है।
गुरुवार देर रात श्री मनोरमा गोलोक तीर्थ नंदगांव पथमेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गौमाता के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी के लिए हम केवल सरकार से अपेक्षा करें तो यह कभी संभव नहीं हो सकता है, लेकिन गौमाता के साथ आमजन को जोड़ना और संकल्प के साथ यदि इतना बड़ा परिसर खड़ा किया जाए तो मेरे पास यह विश्वास न करने का कोई भी कारण नहीं रहता है कि इस देश में गोवंश के कल्याण और संरक्षण के लिए समाज अपनी कमर कस ले तो हम अपने सुनहरे अतीत को वापस लौटा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति और प्रकृति के घटक हमें जो प्राणवायु और जीवन प्रदान करते हैं, उन सब घटकों को देव के रूप में मना गया। जल और वायु को देवताओं के रूप में पूजा गया। पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता है, यह वैज्ञानिकों ने बहुत बाद में पता किया, जबकि हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले पीपल के रक्षासूत्र बांधकर अपने लिए आशीर्वाद के अर्चन की परंपरा बनाई थी। नदियों को देवी के रूप में पूजा गया। हमें अमृत तत्व प्रदान करने वाली गौमाता को भी देवी के रूप में पूजने का विधान ऋषि मुनियों ने किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रकृति के विभिन्न घटकों की महत्ता को समझते हुए सामान्य जनमानस को उसके साथ जोड़ना और जोड़ने के लिए तत्व के रूप में धर्म को उपयोग में लेना, मैं यह मानता हूं कि यह उस समय के समाज के लिए एकमात्र मार्ग था। ऋषि-मुनियों ने इन सबके संरक्षण की जिम्मेदारी धर्म के सूत्र में बांधकर उनके रक्षण, संरक्षण, पोषण और पल्लवन की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन, समय के साथ जिस तरह से परिस्थितियां बदलीं। पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव देश में होने लगा। हम उन सब चीजों से दूर होते चले गए। धर्म की परिभाषा बदलते हुए विकृत हो गई।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर इस बात की चर्चा करते हैं कि कोई भी सरकार किसी बड़े विषय या समस्या का अकेले सामना या समाधान नहीं कर सकती, लेकिन यदि उस विषय की जिम्मेदारी सामान्य जन और समाज अपने कंधों पर ले ले तो निश्चित रूप से उस विषय का समाधान बड़ी सुगमता के साथ हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मैं सीमावर्ती क्षेत्र में काम कर रहा था। वर्ष 2004-05 में जब पूरे पश्चिमी राजस्थान में भीषण अकाल की विभीषिका थी, तब मुझे लाखों गोवंश की सेवा करने का मौका मिला था। उस समय संगठन के माध्यम से हमने 100 से ज्यादा शिविर लगाए थे। उसी दौरान मेरा स्वामी दत्तशरणानंद जी से परिचय हुआ था। शेखावत ने कहा कि आज इस परिसर में आकर मुझे बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है। वैज्ञानिक तत्व के समावेश के साथ-साथ समाज को जोड़ने की रचना स्वामीजी के मार्गदर्शन में की जा रही है। उन्होंने कहा कि पथमेड़ा गोधाम गौसेवा की पुरातन परंपरा को संरक्षित और प्रसारित करते हुए गौसेवकों को रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है। अपनी संस्कृति की महिमा को बनाए रखते हुए आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने में यह तीर्थ निश्चित रूप से विशेष योगदान दे रहा है।

