नागौर का भावण्डा हत्याकांड : आज भी कोई सुलह नहीं हो पाई, शव के साथ पुलिस थाने का घेराव

भावण्डा

नागौर। आरएलपी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल लगातार दूसरे दिन भी दिवगन्त सुनील उर्फ सोनू के शव के साथ भावण्डा थाने पर ग्रामीणों के घेराव पर बैठे रहे। सांसद बेनीवाल ने सुनील ताडा हत्याकांड के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि खींवसर क्षेत्र की इस घटना में अपराधी-पुलिस के गठजोड़ के वाकये को सच कर दिया, क्योंकि भावण्डा थाना क्षेत्र में 15 दिवस पूर्व सुनील उर्फ सोनू ताडा नामक युवक का अपहरण होता है और 2 दर्जन से अधिक लोग उसके साथ निर्मम पिटाई करते है और उसके घुटने से लेकर नीचे तलवे तक ड्रिल मशीन से छेद कर दिए गए जाते है और उसको मरा हुआ समझकर सुनसान स्थल पर फेंक दिया जाता है।

उसके बाद सोनू का अपहरण होता है उसकी सूचना पुलिस को दे दी गई, लेकिन पुलिस के जिम्मेदारों ने कहा गाड़ी में ईंधन नही है, बाद में उसका पता लगाएंगे और ईंधन भी बाद में पीड़ित परिवार से डलवाया जो पुलिस की नाकामी व गैर जिम्मेदाराना रवैये का पहला कदम था और ऐसे निर्मम कृत्य का पता लगने के बावजूद जब हत्या का प्रयास 307 जैसी धारा में मुकदमा दर्ज करने के बजाय मुल्जिमो के पक्ष को मजबूत रखने के लिए हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाता है।

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इस मामले में पुलिस का यह वो दूसरा कदम है जो अपराधी-पुलिस के गठजोड़ की सच्चाई को बयां करते है और 10 दिन तक एक तरफ जहां सोनू जिसके परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय है और जो अपने पिता का इकलौता पुत्र था,जीवन-मृत्यु के मध्य संघर्ष कर रहा था और पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने व घटना को अंजाम दिलवाने वाले षड्यंत्रकारियों को गिरफ्तार करने व मामले में तह तक अनुसंधान करने के स्थान पर सोनू के मरने का इंतजार करती रही और इस अवधी में पुलिस थाने में व पुलिस के अफसरों के साथ आरोपियों व आरोपी पक्ष का मेल-मिलाप जारी रहा यह पुलिस का उक्त मामले मे वो तीसरा कदम था। जिससे आम जन में पुलिस के प्रति भयंकर रोष व्याप्त हुआ।

आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही पुलिस

समाज के रक्षकों के प्रति नफरत पैदा होने लगी और आखिरकार जब जीवन-मृत्यु के मध्य संघर्ष करते हुए सोनू हार कर मृत्यु की चिर निंद्रा में चला गया और उसका परिवार उजड़ गया तब स्थानीय लोगो व जन-प्रतिनिधियों ने सोनू की पार्थिव देह के साथ सम्बन्धित थाने में आरोपियों की गिरफ्तारी करने की मांग को लेकर धरना दिया और 72 घण्टे से अधिक समय व्यतीत हुआ उसके बावजूद पुलिस किसी भी आरोपी को पकड़ने में नाकाम नजर आई। जहां शव को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों ने अपने एकत्रित किये हुए धन से डीप फ्रीजर मंगवाया। उस डीप फ्रीजर में विद्युत सप्लाई देने से पुलिस ने इनकार कर दिया।

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एक तरफ जहां आरोपियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाई। वहीं दूसरी तरफ पुलिस का यह कृत्य भी मानवता को शर्मसार करने वाला है। सांसद ने कहा कि पूरे प्रकरण के एक-एक पहलू पर यदि हम गौर से नजर डालेंगे तो उक्त मामले में ऐसा कोई भी कदम नहीं है जिसमें पुलिस ने अपने धर्म व खाकी के प्रति फर्ज को निभाया है। ऐसा जघन्य अपराध कारित होने के बावजूद पुलिस के ऐसे रवैये ने आम जन को मजबूरन पुलिस से नफरत पैदा कर दी और सिस्टम में बैठे पुलिस के अफसर व कार्मिक जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले में किसी न किसी रुप में जिम्मेदार है, उन्हें निलंबित तक नही किया गया।

दोषी थाने के स्टाफ का हो निलंबन, परिजन को मिले आर्थिक पैकेज

सांसद ने कहा कि एक तरफ जहां राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार खुद को संवेदनशील सरकार तथा अपराध के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की बात करती है। वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं सरकार की कार्यशैली व सरकार की मंशा तथा कानून के रक्षकों की कार्यशैली के प्रति बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। उन्होंने सीएम गहलोत से अपील करते हुए कहा कि सरकार में यदि जरा सी भी संवेदनशीलता शेष है तो मामले में तत्काल संज्ञान लेकर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करके उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई कराएं एवं दोषी थाने के स्टाफ का निलंबन करके दिवगन्त के परिजन को आर्थिक पैकेज जारी करावे। सांसद ने कहा डीजीपी से दूरभाष पर हुई वार्ता के बाद एसपी मौके पर आए और वार्ता के क्रम में अब तक कोई कार्यवाही पुलिस ने नही की जो पुलिस की करनी व कथनी में फर्क को दर्शाता है। सांसद ने पूरे मामले को लेकर कई ट्वीट किए।

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