लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की चुनावी जंग तेज हो गई हैं। जिसके लिए एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का उत्साह और मनोबल बढ़ाने के लिए बीजेपी नेतृत्व ने कई मोर्चों पर कार्य तेज कर दिया है। योगी सरकार ने निगम, आयोग, बोर्ड व निकायों के रिक्त पदों पर राजनीतिक तैनाती का काम शुरू कर दिया। वहीं, बीजेपी कोरोना पीड़ित कार्यकर्ताओं के घरों तक पहुंचकर उनके दर्द को कम करने के लिए संवेदनाएं जताने में जुट गए है।
उत्तर प्रदेश में प्राइमरी और जूनियर शिक्षक बड़ी तादाद में है, जो सत्ता बनाने और बिगाड़े की ताकत रखते हैं। पिछले दिनों कोरोना काल में हुए पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के दौरान संक्रमित हो जाने के चलते बड़ी संख्या में शिक्षकों की मौत हो गई थी। ऐसे में शिक्षकों की नाराजगी को देखते हुए योगी सरकार डमैज कन्ट्रोल में जुट गई है। मरने वाले शिक्षक के परिवारों को 30-30 लाख की आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया गया है।बीजेपी यूपी में चुनाव से पहले अपने कार्यकर्ताओं को समायोजित करने के लिए संगठन के विभिन्न मोर्चा व प्रकोष्ठों का गठन भी जल्द करने जा रही है।
योगी सरकार ने शुरू की राजनीतिक नियुक्तियां
यूपी में सात महीने के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए योगी सरकार अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को खुश करने में जुट गई है। बुधवार को यूपी में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग में अध्यक्ष व उपाध्यक्षों के अलावा 12 सदस्यों को नामित करके कार्यकर्ताओं के असंतोष को खत्म करने का प्रयास किया गया है। एससी-एसटी आयोग में बीजेपी ने क्षेत्रीय और जातीय वर्ग का संतुलन बनाने की पूरी कवायद की है, जिसमें जाटव से लेकर पासी और कोरी समुदाय तक को जगह दी गई है।
