प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गाय को सिर्फ धार्मिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए। संस्कृति की रक्षा हर नागरिक को करनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए और इसके लिए संसद में बिल लाना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गाय की पूजा होगी तभी देश समृद्ध होगा। बता दें कि बुधवार को जावेद नाम के शख्स की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने ये गंभीर टिप्पणी की है।
जावेद पर गोहत्या रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत केस दर्ज है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गोरक्षा सिर्फ किसी एक धर्म की जिम्मेदारी नहीं है। गाय इस देश की संस्कृति है और इसकी सुरक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट ने पहले भी जताई थी चिंता इससे पहले 26 अक्टूबर, 2020 को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोवध संरक्षण कानून को लेकर अहम टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग करने और बेसहारा जानवरों की देखभाल की स्थिति पर चिंता जताई थी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने गोवध कानून के तहत जेल में बंद रामू उर्फ रहीमुद्दीन के जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के बाद अपने आदेश में चिंता जाहिर की थी। कोर्ट ने याचिका की जमानत मंजूर करते हुए उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर रिहा करने का आदेश दिया है। रामू के जमानत प्रार्थनापत्र में कहा गया था कि प्राथमिकी में याचिका के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं है और न ही वह घटनास्थल से पकड़ा गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मांस बरामद होने पर फोरेंसिक लैब में जांच कराए बगैर उसे गोमांस बताकर निर्दोष व्यक्तियों को जेल भेजा जाता है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में गोवध अधिनियम को सही भावना के साथ लागू करने की जरूरत है।
पुलिस ने बरामद मांस की वास्तविकता जानने का कोई प्रयास नहीं किया कि वह गाय का मांस ही है या किसी अन्य जानवर का। इसके अलावा, पुलिस ने बरामद मांस की वास्तविकता जानने का भी कोई प्रयास नहीं किया कि वह गो मांस ही है या किसी अन्य जानवर का। कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर मामलों में जब मांस पकड़ा जाता है तो उसे गो मांस बता दिया जाता है। उसे फोरेंसिंक लैब नहीं भेजा जाता और आरोपी को उस अपराध में जेल जाना होता है जिसमें सात साल तक की सजा है और विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अदालत में होता है।
65 साल पुराना कानून बदला गया
इससे पहले वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गोवंश संरक्षण को लेकर कानून बनाया था। जून, 2020 में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी। इसी के साथ ही यूपी में गोहत्या व गोवंश को शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर कठोर सजा वाले प्रावधान लागू हो गए हैं। 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही गौ-रक्षकों में एक उम्मीद जगी थी।
