जयपुर। गायत्री परिवार राजस्थान की ओर से आयोजित की जा रही आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी निशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला के छठे दिन बुधवार को मुंबई की श्रद्धा साहू ने गर्भस्थ शिशु की बहु प्रतिभा विकास पर प्रभावी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि मां अपने बच्चे में जो प्रतिभा विकसित करना चाहती है उससे पहले उन्हें वैसे ही प्रतिभा खुद में विकसित करने के प्रयास करने होंगे। गर्भवती महिला को सुबह उठने से लेकर रात्रि शयन तक पूरी तरह सधी हुई आदर्श दिनचर्या का पालन करना चाहिए। छोटे-छोटे कार्यों को प्रभावी तरीके से गर्भस्थ शिशु के साथ संवाद करते हुए करेंगी तो गर्भस्थ शिशु में बहु प्रतिभा का विकास होगा।

8 तरह की बहु प्रतिभाएं
उन्होंने कहा कि 8 तरह की बहु प्रतिभाएं होती है। इसमें आई क्यू को लोग सबसे अधिक महत्व देते हैं। लेकिन पहली तीन प्रतिभा भी विकसित हो जाती है तो शेष 5 प्रतिभाएं स्वतः विकसित हो जाती है। प्रतिदिन योग- प्राणायाम करने, अच्छा संगीत सुनने, पेड़ लगाने, सूर्य को अर्घ्य देने, महापुरुषों की जीवनी सुनने, बुद्धि आधारित खेल खेलने, गर्भ संवाद करने से सभी आठों बहु प्रतिभाएं विकसित हो सकती है। इससे पहले श्रद्धा साहू ने आठों तरह की प्रतिभाओं की प्रोजेक्टर के माध्यम से उदाहरण सहित प्रारंभिक जानकारी दी।

श्रद्धा साहू ने गर्भस्थ शिशु के भावनात्मक निर्माण पर सर्वाधिक जोर देते हुए कहा कि जिस बच्चे में भावनाएं अधिक होगी वह आगे चलकर हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है । इसलिए मधुर संगीत और महापुरुषों की जीवन गाथा गर्भस्थ शिशु को अधिक से अधिक सुनानी चाहिए। कार्यशाला के अंतिम आधे घंटे में गर्भवती महिलाओं ने प्रश्न पूछें जिसका श्रद्धा साहू ने तर्कसंगत जवाब दिया। इससे पूर्व गायत्री चेतना केंद्र दुर्गापुरा से सुशील कुमार शर्मा ने कार्यशाला का संचालन किया। गुरुवार को स्तनपान क्यों कैसे हो और उसके महत्व पर डॉ माधुरी पराले का उद्बोधन होगा।
