हाइड्रोकार्बन खोज के लिए खातेदारी भूमि 15 वर्षों के लिए सबलेट कर सकेंगे खातेदार

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राज्य में हाइड्रोकार्बन यानी की पेट्रोलियम उत्पादों की खोज के लिए खातेदार अपने स्तर से खातेदारी भूमि को 15 वर्षों के लिए सबलेट कर सकेंगे।
  • कच्चा खनिज तेल उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर

जयपुर। राज्य में हाइड्रोकार्बन यानी की पेट्रोलियम उत्पादों की खोज के लिए खातेदार अपने स्तर से खातेदारी भूमि को 15 वर्षों के लिए सबलेट कर सकेंगे। माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया है कि इसके लिए खातेदार को भूमि रुपातंरण की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी अपितु केवल संबंधित तहसीलदार को सूचित करना ही पर्याप्त होगा। उन्होंने बताया कि इससे राज्य में हाइड्रोकार्बन खोज व दोहन कार्य में तेजी आएगी।

एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल सचिवालय में पेट्रोलियम विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय 14 पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लीज जारी की हुई है, जिनमें पेट्रोलियम पदार्थों की खोज का कार्य जारी है। इसी तरह से पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन के लिए 13 पेट्रोलियम माइनिंग लीज जारी कर उत्पादन कार्य हो रहा है। राजस्थान बाम्बे हाई के बाद देश में घरेलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राज्य में औसतन प्रतिदिन एक लाख 22 हजार बैरल खनिज तेल का उत्पादन हो रहा हैं। वहीं 4 से 5 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन किया जा रहा है।

नियमित पत्राचार के दिए निर्देश
एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन में लगी कंपनियों के खोज व उत्पादन प्रगति की बारी-बारी से त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी ताकि प्रदेश में तेल व गैस के उत्पादन और राजस्व बढ़ाने की प्रभावी मॉनेटरिंग हो सके।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस विभाग की आपरेटिव व मैनेजमेंट कमेटी में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार स्तर पर लंबित प्रकरणों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने और समन्वय व नियमित पत्राचार के निर्देश दिए।

अतिरिक्त निदेशक पेट्रोलियम अजय शर्मा ने पेट्रोलियम विभाग की गतिविधियों व प्रगति की पीपीटी के माध्यम से जानकारी दी। बैठक में उपसचिव नीतू बारुपाल, पेट्रोलियम विभाग के मनीष माथुर और रोहित मल्लाह ने भी हिस्सा लिया।

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