उदयपुर। भाजपा की धरियावद व वल्लभनगर उपचुनाव करारी हार क्या हुई। कांग्रेस से ज्यादा भाजपा का पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का खेमा ज्यादा उत्साहित नजर आ रहा हैं। राजे के समर्थन में जनाधार जुटाने के लिए राजे समर्थक नेता पूर्व मुख्यमंत्री बसुंधरा राजे की धार्मिक व सामाजिक यात्रा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए है ताकि राजे के समर्थन में जनसमर्थन जुटा केन्द्रीय नेतृत्व को विधानसभा में जाने से पहले राजे को सीएम चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करने के लिए मजबूर किया जाए। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी की त्रिपुरा सुन्दरी के बहाने आदिवासी अंचल की यात्रा को इस तैयारी के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा हैं। परनामी ने इस दौरे में पूर्व मंत्री भवानी जोशी व अन्य आदिवासी नेताओं से मुलाकात की है उसमें राजे की प्रस्तावित धार्मिक व सामाजिक यात्रा पर ही सारा फोकस रहा बताया। उन्होंने जोशी के अलावा पूर्व राज्यमंत्री धन सिंह रावत, होटल लैंड मार्क में ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष लाभचंद पटेल सहित पार्टी के अन्य नेताओं से भेंट की।
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए एक बार तो साफ कह भी दिया था कि राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। फिर बात को संभालते हुए कहा कि पार्टी का संसदीय बोर्ड सीएम तय करेगा। परनामी के बांसवाड़ा आने की सूचना पर वसुंधरा गुट में हलचल तेज हो गई। पूर्व राज्यमंत्री भवानी जोशी के घर पहुंचे परनामी ने मीडिया के सवालों का जवाब बेबाकी से दिया।
भाजपा को खड़ा करने में सिंधिया परिवार का बड़ा योगदान
वसुंधरा राजे के नाम के साथ उनके चेहरे के भाव नजर आए कि वे यहां किस मिशन पर आए हैं। प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा उप चुनाव में स्टार प्रचारक के तौर पर वसुंधरा राजे को पार्टी से दूर रखने और इसमें मिली चुनावी हार के बारे में परनामी बोले, यह पार्टी स्तर का विषय है। इस बारे में समीक्षा चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी को खड़ा करने में सिंधिया परिवार का बड़ा योगदान है। पार्टी वसुंधरा को चुनाव से दूर रखेगी। ऐसा सोचना भी गलत है।
अलग बैनर पर चुनाव लडऩे का प्रश्न ही नहीं उठता
परनामी ने कहा वे पुराने साथियों से मिलने आए हैं। जब उनसे पूछा गया कि वसुंधरा गुट की ओर से अलग से पार्टी बनाकर भाजपा के विरोध में चुनाव लड़ा जाएगा। वसुंधरा गुट के अलग से पार्टी बनाने वाली बात को भी परनामी ने गलत बताया। परनामी ने कहा कि वसुंधरा भाजपा की थी, हैं और आगे भी रहेंगी। इस बीच परनामी की अधिकृत यात्रा नहीं होने के कारण पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने उनसे दूरी बनाए रखी। केवल ऐसे ही पदाधिकारी परनामी के साथ खड़े दिखे, जिनका राजनीति में भविष्य अंधकार में है।
