IUI पर एक दिवसीय वर्कशाॅप आयोजित,70 से ज्यादा निःसंतानता रोग विषेशज्ञों ने लिया भाग

निःसंतानता के इलाज की नई विधाओं पर हुई चर्चा

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IUI पर एक दिवसीय वर्कशाॅप आयोजित,70 से ज्यादा निःसंतानता रोग विषेशज्ञों ने लिया भाग

उदयपुर: पेसिफिक मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के आईवीएफ विभाग की ओर से आईयूआई (IUI) पर एक दिवसीय वर्कशाॅप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप का उद्घाटन पीएमसीएच के चेयरमेन राहूल अग्रवाल,सीईओ शरद कोठारी,पेसिफिक मेडिकल विश्व विद्यालय के वाइस चाॅसलर डाॅ.ए.पी.गुप्ता,पीएमसीएच के प्रिसिंपल डाॅ.एम.एम.मंगल,स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डाॅ.राजरानी शर्मा,निःसंतानता रोग विषेशज्ञ डाॅ.परिक्षित टाॅक एवं पेसिफिक आईवीएफ की साईन्टिफिक डाॅयरेक्टर डाॅ.मनीशा वाजपेयी ने माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन करके किया। इस वर्कशाॅप में 70 से ज्यादा निःसंतानता रोग विषेशज्ञों ने निःसंतानता के इलाज की नई विधाओं पर अपने विचार रखें।
वर्कशाॅप के इस मौके पर निःसंतानता रोग विषेशज्ञ डाॅ.परिक्षित टाॅक ने निःसंतानता के शीघ्र निदान के बारे में बताया। उन्होनें कहा कि जैसे जैसे निःसंतानता के मरीज दिनो दिन देश मे बढ रहे इन्हे रोकने के लिए हमें प्रारंभिक अवस्था में जाॅच की आवश्यकता है जिससे निःसंतानता की जटिलताओं के साथ-साथ इसके उपचार की लागत को कम किया जा सकता है।

इस अवसर पर पेसिफिक आईवीएफ की साईन्टिफिक डाॅयरेक्टर डाॅ.मनीषा वाजपेयी ने निःसंतानता के क्षेत्र में हो रही नई रिर्सचो का उल्लेख करते हुए बताया कि आईयूआई एक साधारण तकनीक है। इसके द्वारा गुणवत्ता पूर्ण उपचार एवं नई तकनीक का उपयोग करके विफलता के कुछ कारणों से बचा जा सकता है। साथ ही आईयूआई द्वारा इलाज के लिए बड़े सेटअप की आवश्यकता नहीं होती है। छोटी जगहो पर इस उपचार को बढावा देकर निसंतानता की बड़ी समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

वर्कशाॅप के दौरान पेसिफिक हाॅस्पिटल के स्त्री एवं प्रसूति विभाग की विभागाघ्यक्ष डाॅ.राजरानी शर्मा ने बताया कि आईयूआई एक ऐसा उपचार है जो लगभग 50 फीसदी जोड़ों में सफलतापूर्वक मदद कर सकता है। यह आईवीएफ की तुलना में एक आसान और कम खर्चीला विकल्प है और युवा जोड़ों में इसकी सफलता दर अच्छी है, बस इसके लिए सही चुनाव जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डाॅ.रमा चुण्डावत ने किया।
इस वर्कशाॅप मे प्रतिष्ठित निःसंतानता रोग विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और निःसंतानता के इलाज के लिए उपचार की नई विधाओं पर चर्चा की।

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