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पूर्व विधायक गजेंद्र शक्तावत के परिवार में टिकट पर घमासान: वल्लभनगर टिकट को लेकर कांग्रेस की लड़ाई सड़को पर आई

उदयपुर। भले ही उपचुनाव की तिथि न आई हो,लेकन उसके पहले टिकटों को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया हैं। वल्लभनगर को लेकर शक्तावत परिवार की राजनीति सड़क पर आ गई। पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के निधन के बाद वल्लभनगर से टिकट की दावेदारी कर रहे के बड़े भाई देवेंद्र सिंह शक्तावत ने अपने ही भाई के खिलाफ बगावती सुर छेड़ दिए। देवेंद्र ने पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रीति शक्तावत पर गंभीर आरोप लगाए। देवेंद्र ने यहां तक कह डाला कि अगर प्रीति शक्तावत को टिकट मिला तो वो कांग्रेस पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

देवेन्द्र ने अचानक किया ये विस्फोट
वल्लभनगर की टिकट को लेकर परिवार में झगड़े की खबरे तो पहले भी छन-छन कर आ रही थी,लेकिन आज अचानक भीलवाड़ा से उदयपुर पहुंच देवेन्द्र सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस नेतृत्व को भी टिकट को लेकर खुली चुुनौती दे डाली। प्रेस कांफे्रंस में उनके साथ वल्लभनगर क्षेत्र तथा उदयपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी पदाधिकारी भी मौजूद थे।

वल्लभनगर विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का 7 माह पूर्व निधन हो गया था। यहां उपचुनाव होने हैं। सीट पर कांग्रेस से गजेंद्र की पत्नी प्रीति शक्तावत और उनके बड़े भाई देवेंद्र सिंह शक्तावत सहित कई लोग दावेदारी कर रहे हैं। मगर गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। इसी के चलते देवेन्द्रसिंह का आज मीडिया में दिया बयान कांग्रेस के लिए नया सिरदर्द बन गया हैं।

क्या कहा देवेन्द्र ने
देवेंद्र ने आरोप लगाए कि कांग्रेस पार्टी उनके पिता स्व. गुलाबसिंह शक्तवत के आदर्शों और उसूलों के साथ कांग्रेस की रीति -नीति का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने की मंशा रखती है। वे कांग्रेस पार्टी छोडकऱ कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों की मान सम्मान की लड़ाई चुनाव में निर्दलीय खड़े होकर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके अनुज गजेंद्रसिंह शक्तावत को 2008 में कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया।

तब कांग्रेस के समस्त निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत कर इस सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया लेकिन उसके बाद वल्लभनगर विधानसभा सीट पर कांगेस पार्टी का ग्राफ निरन्तर गिरता गया। वर्ष 2013 विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा और 2018 के चुनाव में प्रदेश में कांगेस पार्टी की प्रचंड लहर के बावजूद हम वल्लभनगर विधानसभा में 30 प्रतिशत मत पाने में ही सफल हो पाए। हम चुनाव तो जीत गये लेकिन उसके बाद पार्टी का वरिष्ठ व्यक्ति पदाधिकारी और कार्यकर्ता हमेशा खुद को ठगा सा महसूस करने लगा।

पंचायत-पालिका चुनाव में भी हार का मुंह देखना पड़ा
पंचायतीराज चुनाव 2020 में कांग्रेस पार्टी को 6 जिला परिषद सदस्य में से 5 पर करारी हार का सामना करना पड़ा। वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र स्थित 3 पंचायत समितियों वल्लभनगर, कुराबड़, भींडर में से 1 पर भी कांगेस पार्टी का प्रधान काबिज नहीं हो पाया। शहरी निकाय चुनाव में भींडर नगरपालिका टिकट वितरण में धांधली करने से पार्टी बुरी तरह से हार गई। लोकसभा चुनाव में वल्लभनगर विधानसभा में इन्हीं धांधलियों के कारण कांग्रेस पार्टी को 80,000 से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा।

मंथली वसूली के गंभीर आरोप भी लगाए
कांग्रेस की दुर्दशा के कारण बताते हुए कहा कि वल्लभनगर क्षेत्र के करीब 150 उचित मूल्य की दुकानदारों से मंथली वसूली की जाती थी। जिससे आमजन, गरीब, मजदूर वर्ग को राशन सामग्री पाने में बहुत दिक्कतें हुईं। वर्ष 2020 में राजस्थान सरकार को निजी स्वार्थ की खातिर गजेन्द्रसिंह शक्तावत द्वारा सरकार गिराने के प्रयास में खुलकर सहयोग किया। अधिकतर समय बीमार रहे, विधायक के 2 वर्ष के कार्यकाल में उनकी धर्मपत्नी प्रीति कुंवर ने हस्तक्षेप किया। जिसमें अधिकारियों से चौथ वसूली के आरोप लगे। पंचायतीराज चुनाव एवं शहरी निकाय के चुनाव उनकी धर्मपत्नी के नेतृत्व में ही हुए जिसमें क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा कि पैसे लेकर टिकट बांटे गए जिससे सम्पूर्ण चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ा।

महत्वकांक्षा में बोल रहे हैं
देवेंद्र सिंह शक्तावत के आरोपों पर प्रीति शक्तावत ने कहा कि वो घर के बड़े हैं, महत्वकांशा में कुछ भी बोल सकते हैं। उनके खिलाफ ना गजेंद्र शक्तावत जी ने कभी कुछ बोला ना ही मैं बोलूंगी। अगर कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरा होता तो उदयपुर जिले की 8 में से सिर्फ 2 विधानसभा में कांग्रेस के खाते में आई सीटों में से 1 वल्लभनगर की नहीं होती। मैंने टिकट की कभी बात नहीं की। जो पार्टी निर्णय करेगी, स्वीकार करेंगे।

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