उदयपुर : सलूम्बर से भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा द्वारा फर्जी अंक तालिका से पत्नी को सरपंच का चुनाव लड़वाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सोमवार को सराडा कोर्ट में सरेंण्डर होने के बाद, हुई सुनवाई में जमानत याचिका खारिज हो गई व कोर्ट ने जेल भेजने के निर्देश दे दिये ।
मामला 2015 में हुए पंचायत चुनावों से जुडा हुआ है जिसमें विधायक की पत्नी शांता देवी ने सेमारी सरपंच पद का चुनाव लडा। जिसमें विधायक की पत्नी विजयी हुई । शांतादेवी की प्रतिद्वन्द्वी सेमारी के लालपुरिया की सुगनादेवी ने न्यायालय में विधायक व उनकी पत्नी पर फर्जी तरिके से मार्कशीट बनवाकर चुनाव लडने का आरोप लगाते हुए परिवाद दर्ज करवाया ।
उल्लेखनीय है कि पंचायतीराज के उक्त चुनावों में सरपंच पद के प्रत्याशी जनजाति के लिए पांचवी उत्तीर्ण व सामान्य के लिए आठवीं की योग्यता होना अनिवार्य था। प्रार्थीया द्वारा दर्ज मामले में विधायक की पत्नी द्वारा प्रत्याशी नामांकन के साथ जमा करवाई मार्कशीट फर्जी होने का आरोप लगाते हुए विधायक व उनकी पत्नी जांच की मांग की थी।
न्यायालय में दिये प्रार्थना पत्र धारा 156 (3) पेश किया जिस पर सेमारी थाना पुलिस द्वारा शांतादेवी व अमृतलाल मीणा के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की। इस मामले पर सीआईडी,सीबी द्वारा अनुसंधान के दौरान शांता देवी के विरुद्ध आईपीसी 420, 467, 468, 471 का आरोप प्रमाणित मानकर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
सलूम्बर विधायक अमृतलाल मीणा के विरुद्ध अनुसंधान शेष रखते हुए धारा 173 (8) के आरोप पत्र पेश किया। चुकि मामला गंभीर होने से सुप्रीम कोर्ट तक पहूंचा। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विधायक को तीन सप्ताह में स्थानीय कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के आदेश दिये। शुक्रवार को विधायक के सरेंण्डर करने का था लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वकील के जरिये चार दिन का समय मांगा था। हालांकि विधायक के खुद के बचाव के लिए अभी भी विकल्प खुले है वे एडीजे सहित उच्च स्तर पर अपना पक्ष रख सकते है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सोमवार को सराडा कोर्ट में उपस्थित हुए विधायक ने वकील के जरिये जमानत की याचिका भी दायर की जिसमें सरकारी वकील व बचाव पक्ष की करीब ढाई घंटे चली बहस व पुलिस पत्रावली के आधार पर कोर्ट ने विधायक की जमानत खारिज करते हुए जेल भेजने के निर्देश दे दिये। इस मौके पर एएसपी लखमण रॉय, सराडा डीएसपी डूंगर सिंह , थानाधिकारी अनिल विश्नोई , दोनों पक्षों के वकील मौजूद रहे।
