बिसाऊ। यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई कर रहे बिसाऊ कस्बे के छात्र मोहम्मद माजिद सकुशल अपने घर लौट आया। इस होनहार बालक की वतन वापसी से पूरे कस्बे में खुशी की लहर दिखाई दी। घर – परिवार वालो के साथ कस्बे के गणमान्य जन भी पहुंच मोहम्मद माजिद का माला पहना स्वागत कर रहे हैं। बिसाऊ के उत्तरादा दरवाजे के बाहर मोहम्मद माजिद के घर उससे मिलने और उसे देखने वालों का दिनभर तांता सा लगा रहा। यूक्रेन से सकुशल पहुंचे इस छात्र को देखने की हर किसी मे उत्सुकता है उसके चलते मिलने आने वालों के कारण मेले जैसी भीड़ है। परिजन सबको मिठाईयां बांटकर खुशी का इजहार कर रहे हैं। लोग यूक्रेन के हालातों के बारे में मोहम्मद माजिद से जानने के भी उत्सुक दिखाई दिए।
भविष्य को लेकर चिंता
इन सब खुशियों के बीच मोहम्मद आरिफ के बेटे माजिद भविष्य को लेकर चिंतित है कि आगे की पढ़ाई कैसे और कहां पूरी होगी। मोहम्मद माजिद 3rd year के छात्र है तथा वे यूक्रेन के उजहोरोद की नेशनल यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत थे। इस क्षेत्र में युद्ध जैसा तो कुछ नहीं था। वे और उनके साथी आराम से रह रहे थे। कॉलेज प्रशासन भी उनका पूरा सहयोग कर रहा था, लेकिन रूसी सेना कब इस इलाके में पहुंच जाए उसका खतरा तो मंडरा ही रहा था। दूसरा यूक्रेन छोड़ने की एडवाइजरी के कारण देश तो आना ही था। पूरा परिवार भी चिंतित था।
पलायन से बॉर्डर जाम
युद्ध ने यूक्रेन के हालात इस कदर बिगड़े हुए है उसका अहसास माजिद और उसके साथियों को उजहोरोद से हंगरी बॉर्डर पहुंचने के दौरान ज्यादा हुआ। हंगरी बॉर्डर पार कर बुडापेस्ट पहुंचने में ही 20 से अधिक घंटे का समय लगा जबकि यूक्रेन के जिस क्षेत्र में माजिद रह रहा था, वह तो हंगरी बॉर्डर से सटा हुआ इलाका है। इससे युद्ध के कारण यूक्रेन छोड़ने वालों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। केवल भारतीय ही नहीं अन्य देशों यहां तक यूक्रेनी भी बड़ी तादाद में यूक्रेन छोड़ सुरक्षित शरण लेने के चक्कर मे हंगरी पहुंच रहे हैं। इसके चलते पूरा बॉर्डर जाम है।
हंगरी में मंत्री पुरी भी जुटे है सेवा में
बुडापेस्ट (हंगरी) में तो भारतीय दूतावास, स्वयंसेवी संगठन सब यूक्रेन से पहुंचे सब भारतीयों की सेवा में जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी स्वयं व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मोहम्मद मजीद से भी पुरी ने कुशलक्षेम जानी और फोटों खिंचवाया। मोहम्मद माजिद को फ्लाइट में बारी आने के चक्कर मे 2 से 3 दिन बुडापेस्ट में गुजारना पड़ा, लेकिन बुडापेस्ट में किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं हुई। वहां से मुम्बई और फिर जयपुर में सरकार के प्रतिनिधि मौजूद थे तथा एक – एक को घर पहुंचाने की व्यवस्था कर रखी थी।


