सचिन पायलट के फिर बगावती तेवर

- सुलह कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का अलापा राग - उप चुनाव मतदान से तीन दिन पहले पायलट के बयान के निकाले जा रहे हैं सियासी मायने

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जयपुर : पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके खेमे के स्वर फिर से तीखे होते जा रहे हैं। सुला कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की बात रख कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में फिर से खलबली मचा दी हैं। राज्य में हो रहे तीन उप चुनावों के मतदान से पूर्व पायलट के बयानों के सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। उपचुनाव क्षेत्रों पायलट समर्थकों की उदासीनता भी सर्व विदित हैं, हालांकि इसके विपरीत पायलट कैमरे पर उपचुनाव वाली तीनों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत का दावा करते नजर आएं।

पायलट खेमे को असल में पिछले साल जुलाई में बगावत और फिर अगस्त में हुई सुलह के बाद बनी सुलह कमेटी की सिफारिशों पर एक्शन टेकन का इंतजार है। सचिन पायलट ने अब कमेटी में बनी सहमति के बिंदुओं पर तत्काल अमल करने की बात उठाई है।

पायलट ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पीसीसी में मीडिया से बातचीत में कहा-कई माह पहले एक कमेटी बनी थी। दुर्भाग्यवश अहमद पटेल का स्वर्गवास हो गया और उस पर आगे काम नहीं हो पाया। मुझे विश्वास है कि अब और ज्यादा विलंब नहीं होगा। जो चर्चाएं की थीं और जिन मुद्दों पर आम सहमति बनी थी, उस पर तुरंत प्रभाव से कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसा होगा मुझे लगता है।

घोषणापत्र को लेकर भी निशाना साधा
पायलट ने कहा- मुझे सोनिया गांधी पर पूरा विश्वास है, उनके आदेश पर ही कमेटी बनी थी। अभी कमेटी में दो सदस्य हैं। उपचुनाव भी अब दो दिन में खत्म हो जाएंगे, पांच राज्यों के चुनाव थे, वह भी समाप्त होने को हैं । मुझे नहीं लगता कि अब कोई ऐसा कारण है कि उस कमेटी के निर्णयों के क्रियान्वयन में और अधिक देरी होगी। जहां तक मेरा अपना मानना है कि सरकार को ढाई साल हो चुके हैं, घोषणा पत्र में जो वादे किए थे, कुछ पूरे भी किए हैं। बचे हुए कार्यकाल में वादों को पूरा करने के लिए और गति से काम करना होगा। इसमें राजनीतिक नियुक्तियां हैं, मंत्रिमंडल का विस्तार है। उसमें पार्टी और सरकार मिलकर एकराय बनाएंगे।

समर्थक विधायकों के समर्थन में आए पायलट, कहा- जनप्रतिनिधियों ने जो मुद्दे उठाए, उन पर तुरंत कार्रवाई हो।रमेश मीणा और अन्य विधायकों के दलित आदिवासी विधायकों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाने पर पायलट ने समर्थन किया है। पायलट ने कहा- नाराजगी की बात नहीं है जो व्याव​हारिक और सामाजिक मुद्दे हैं, उन्हें हर जनप्रतिनिधि चाहे वह सरपंच हो प्रधान हो या सासंद विधायक हो, उसे समय-समय पर उठाते रहते हैं। मुझे उम्मीद है जनप्रतिनिधियों ने जिन बातों को उठाया था, उस पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए।

सियासी मायने

सचिन पायलट के दोनों बयानों की आज सियासी हलकों में गूंज रही। लंबे अरसे बाद पायलट ने सुलह कमेटी और खुद के समर्थक विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर खुलकर राय रखी है। जुलाई में बगावत के बाद खुद पायलट को डिप्टी सीएम पद से और उनके दो समर्थकों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। सचिन पायलट खेमा अब मंत्रिमंडल में अपने समर्थक विधायकों के लिए 5 से 6 मंत्री पद बनाने की दावेदारी कर रहा है तो राजनीतिक नियुक्तियों में भी बराबर की भागीदारी मांग रहा है।

 

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