भगवामय हुआ राजस्थान, हजारों श्रमिकों ने निकाली ‘‘मज़दूर आक्रोश रैली’’

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जयपुर : भारतीय मजदूर संघ, राजस्थान प्रदेश की ओर से सरकार की मजदूर एवं कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर शहीद स्मारक से सिविल लाइन फाटक तक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। भामस की इस रैली को संघ के अखिल भारतीय महामंत्री विनय कुमार सिन्हा एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री राजबिहारी शर्मा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। रैली शहीद स्मारक से रवाना होकर सीपीएमजी कार्यालय, चौमू हाउस सर्किल, भाजपा कार्यालय होते हुए सिविल लाइन फाटक पर विशाल सभा के रूप में परिवर्ति हो गई। सभा को संघ के अखिल भारतीय महामंत्री विनय कुमार सिन्हा, अखिल भारतीय वित्त सचिव एस के राठौड़, क्षेत्रीय संगठन मंत्री राजबिहारी शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र डाबी, प्रदेश महामंत्री हरिमोहन शर्मा, रैली संयोजक दीनानाथ रूंथला, सहित प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने बीएमएस के प्रतिनिधियों को बुलाकर की वार्ता

सरकार के आमंत्रण पर भारतीय मजदूर संघ का एक 7 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल जिसमें अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह डाबी, महामंत्री हरिमोहन शर्मा, उपाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, उपाध्यक्ष मधुसूदन शर्मा, प्रदेश मंत्री यतीन्द्र कुमार ने मुख्यप्रतिनिधियों से वार्ता की एवं अपना मांग-पत्र सौंपा।

तत्काल लागू हो पुरानी पेंशन: सिन्हा

संगठन के अखिल भारतीय महामंत्री विनय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना एक बहुत बड़ा विषय है। आईएलओ में मजदूर समस्याओं एवं उन्हें कैसे सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाए इन विषयों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि आज की यह रैली केवल राजस्थान में ही नहीं अपितु पूरे भारत में हो रही है इससे पहले यह रैली भाजपा शासित प्रदेशों गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं मध्यप्रदेश में हो चुकी है। हम यह रैली सभी सरकारों चाहे वह केंद्र हो या राज्य सरकार सभी को जगाने के लिए कर रहे हैं। सरकारें अपने ही आदेश अभी तक लागू नहीं कर पा रही हैं।

राजस्थान सरकार ने पुरानी पेंशन की घोषण की है हम उसका स्वागत करते हैं लेकिन यह भी मांग करते हैं कि इसमें निगम और उपक्रम के कर्मचारियों को भी शामिल किया जाए। आज हमारी रैली को सरकार ने अनुमति देने में बहुत आना-कानी की है, हमारे इस भगवे झण्डे का राजनीतिकरण करने की कोशिश की है लेकिन हम सरकार को यह बताना चाहते हैं कि भगवा झण्डा प्रेम एवं सद्भावना का प्रतीक है। इस झण्डे को सरकार को सरोकार कर मजदूर और कर्मचारियों की समस्यओं को दूर करने की जरूरत है। यदि सरकारें नींद से नहीं जागेंगी तो भारतीय मजदूर संघ उन्हें जगाने का माद्दा रखता है।

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उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र एवं राज्य सरकारों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने सहित सारे प्रावधान लागू करने के लिए आदेश पारित किया था, कि ग्रेच्यूटी के साथ-साथ स्थापना एवं सामाजिक सुरक्षा के सारे प्रावधान लागू हों लेकिन अभी तक यह लागू नहीं हुआ है। हम यह मांग करते हैं कि तत्काल यह लागू हो और उन्हें न्याय मिले। उन्होंने यह कहा कि आज भी श्रमिकों के लिए सरकारें मिनिमम वेज का आदेश लागू नहीं कर पाई हैं इसलिए हम यह मांग करते हैं कि तत्काल सभी सरकारें मिनिमम वेज लागू कर श्रमिकों को न्याय दें। सरकार ने 1948 में वेज कमेटी बनाई थी जिसके प्रमुख बी आर आंबेडकर जी थे और उसमें वेज के लिए मिनिमम वेज, डीसेंट वेज, लिविंग वेज की बात की गई थी परंतु अभी तक हम मिनिमम वेज ही लागू नहीं कर पाए बाकी डीसेंट वेज और लिविंग वेज की बात करना बेमानी है।

सरकार कन्सट्रंक्शन मजदूरों से जो सेस का पैसा लेती है उसका भी वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए दुरूपयोग कर रही हैं जबकि इस पैसे का मजदूरों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए इसलिए हम राजस्थान सरकार से यह मांग करते हैं कि बंद पड़ी ‘‘शुभ-शक्ति’’ योजना पुनः शुरू की जाए और इस पैसे का उपयोग मजदूर कल्याण में हो। संगठन के क्षेत्रीय संगठन मंत्री राजबिहारी शर्मा ने बताया कि आज भारतीय मजदूर संघ विश्व, भारत सहित राजस्थान का भी सबसे बड़ा संगठन है लेकिन राजस्थान सरकार ने श्रम विभाग की कमेटियों में स्थान न देकर सौतेला व्यवहार किया है, हम सरकार का सीधे विरोध करते हैं और तत्काल मांग करते हैं कि भामस को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए अन्यथा हम सरकार का आने वाले दिनों में लगातार विरोध करेंगें।

उन्होंने अपने उद्बोधन में ठेका प्रथा को तत्काल रोकते हुए सरकार से श्रमिकों का शोषण तत्काल बंद करने और सभी मजदूरों के लिए मिनिमम वेज व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार को चेताया। उन्होंने कहाकि आज केंद्र का मिनिमम वेज अलग है, राज्य का अलग, तो वहीं निजी क्षेत्र का बिल्कुल अलग यह मजदूरों के साथ खिलवाड़ है, भारतीय मजदूर संघ इसका कड़ा विरोध करता है और यदि सरकार नहीं मानी तो हम आने वाले दिनों में इससे भी बड़े प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे और सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि आज भी सरकारें स्कीम वर्कर, आंगनावाड़ी साथिन, एवं आशा सहयोगिनियों को वॉलिंटियर बताकर उनका शोषण कर रही हैं हम सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें तत्काल सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान कर सरकार सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे। सरकार को तत्काल बिजली बोर्ड, रोडवेज बोर्ड में भामस को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए। साथ ही आज रोडवेज के अस्तित्व को प्रश्नचिन्ह लग रहा है न ही रोडवेज के बेड़े में नई बसें आ रही हैं और न ही नई भर्ती हो रही है भामस सरकार से मांग करता है कि तत्काल नई बसे खरीदी जाएं और नई भर्ती की जाएं।

प्रमुख मांगेंः

1. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा सहयोगिनी, मिड-डे-मील वर्कर व ग्राम साथिन को वर्कर का दर्जा दिया जाए साथ ही तात्कालिक तौर पर न्यूनतम वेतन 18000/- प्रतिमाह किया जाए।
2. सभी केंद्रीय एवं राज्य के विभागों सहित निगम बोर्डों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम पुनः लागू की जाए।
3. स्थायी कार्याें में ठेका प्रथा बंद की जाए।
4. श्रम विभाग की समितियों एवं बोर्डों में भामस को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
5. संगठित क्षेत्र की भांति असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि, ग्रेच्युटी, पेंशन और मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए।
6. सरकारी उपक्रमों जैसे- विद्युत, रोड़वेज, डाक, रेलवे, बीएसएनल एवं जलदाय आदि के निगमीकरण/विनिवेशीकरण/निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
7. ग्रामीण डाक सेवकों को रूल-3ए हटाते हुए सिविल सर्वेंट घोषित किया जाए।
8. राज्य के विभिन्न विभागों व उपक्रमों में स्थायी प्रकृति का कार्य करने वाले ठेका कर्मियों, संविदा कर्मचारियों, 108/104 एंबुलेंस कर्मियों इत्यादि को समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
9. सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं कामगारों के लिए 60 वर्ष पूर्ण होने पर न्यूनतम रुपए 3000/- सामाजिक सुरक्षा पेशन योजना लागू की जाए।
10. केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी विभागों एवं उपक्रमों में प्रशासनिक सेवा की भांति 7,14,21 एवं 28 वर्ष सेवा अवधि पूर्ण होने पर चार गारण्टीड प्रमोशनल पोस्ट के वित्तीय लाभ प्रदान किए जाए।
11. रोडवेज में राज्य सरकार के अनुसार 01.01.2016 से 7वां वेतनमान लागू किया जाए साथ ही रोडवेज को परिवहन विभाग में मर्ज किया जाए।
12. विद्युत की 5 कंपनियों का एकीकरण कर पुनः विद्युत मण्डल बनाया जाए एवं विद्युत भत्ते के रूप में विद्युत के कर्मचारियों को 150 यूनिट बिजली प्रतिमाह फ्री दी जाए।
13. भवन निर्माण श्रमिकों के लिए बंद पड़ी शुभशक्ति योजना सहित सभी योजनाओं को पुनः बहाल कर योजना राशि एक लाख रुपए की जाए। साथ ही मजदूरों के पंजीकरण की सुविधा पुनः शुरू की जाए।
14. प्रदेश की समस्त ग्राम सेवा सहकारी समितियों में दिनांक 10.07.2017 तक नियुक्त कार्मिकों की स्क्रीनिंग 2010 के परिपत्र के अनुसार कर राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।
15. लोक जुम्बिश कर्मचारियों को अनुदानित शिक्षाकर्मियों की भांति राजस्थान ग्रामीण स्वेच्छा शिक्षा अधिनियम, 2010 के तहत शिक्षा विभाग में सीधे मर्ज कर नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए।
16. कृषि उपज मंडियों में कार्यरत हम्माल/पल्लेदार, मुनीम गुमाश्ता इत्यादि श्रमिकों हेतु लागू कृषक साथी योजना में मृत्यु की दशा में अनुदान राशि 10 लाख रूपए की जाए।
17. जनता जल योजना को जलदाय विभाग में मर्ज कर कार्यरत पम्प चालकों को स्थायी किया जाए।
18. रेलवे, बीएसएनल एवं डाक में रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाए।
19. थड़ी ठेला मजदूर श्रमिकों को स्थायी रूप से स्थान उपलब्ध कराया जाए।
20. सीमेंट उद्योग में कार्यरत ठेका मजदूरों का न्यूनतम वेतन केंद्र के माईन्स के वेतन के समकक्ष दिया जाए।
21. वन विभाग में कार्यरत जॉब बेसिस कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
22. एनआरएचएम कमियों को नियमित किया जाए।

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