जयपुर। सद्ज्ञान और सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां गायत्री का अवतरण दिवस रविवार को गायत्री जयंती के रूप में पारंपरिक उल्लास और उमंग के मनाया गया। इस कड़ी में अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ से पंचकुंडीय यज्ञ किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति में गायत्री परिजनों ने मानसून में अधिक से अधिक पौधे लगाकर धरती को हरा भरा बनाने का संकल्प लिया। यज्ञ का संचालन करते हुए गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के व्यवस्थापक रणवीर सिंह चौधरी ने कहा कि गायत्री शब्द ज्ञान और सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी है।

आज दुनिया में बुद्धि की कोई कमी नहीं है लेकिन सद्बुद्धि का अकाल पड़ा हुआ है, इसी कारण देश दुनिया में अनेक समस्याएं खड़ी हुई है। अगर दुर्बुद्धि की जगह सद्बुद्धि आ जाए तो हर समस्या का समाधान संभव है। गायत्री मंत्र के जाप और गायत्री को जीवन में उतारने से यह संभव है। दिनेश आचार्य ने माता तेरे चरणों में स्थान जो मिल जाए यह जीवन धन्य बने मां वरदान जो मिल जाए, अवतरित हुई मां गायत्री इस काल शक्ति को पहचानो…प्रज्ञागीत सुनाया। यज्ञ से पहले पर्व पूजन हुआ। गायत्री और मां गंगा सहित विभिन्न देवी देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया गया। यज्ञ कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर गायत्री एवं महामृत्युंजय मंत्र के साथ विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां अर्पित की गई।

कोरोना महामारी से राहत दिलाने की कामना के साथ सूर्य गायत्री मंत्र के साथ विशिष्ट आहुतियां दी गई । यज्ञ की पूर्णाहुति में श्रद्धालुओं ने एक बुराई छोड़ने एक अच्छाई ग्रहण करने तथा अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संकल्प लिया। आरती और शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। गायत्री परिजनों एवं अन्य लोगों ने अपने घरों में जूम एप और यू ट्यूब के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़कर यज्ञ किया। यज्ञ के दौरान शांति कुंज हरिद्वार से गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और शैलबाला पंड्या और गायत्री परिवार राजस्थान प्रभारी जयसिंह यादव का उद्बोधन भी हुआ।

तीनों ने आह्वान किया कि कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के दिशा निर्देशों की पालना करते हुए अपने कार्यक्रम करें। कोरोना की तीसरी लहर से खुद को और अपनों को बचाएं। इस दौरान सेवा कार्य भी करते रहे। साथ ही मानसून के दौरान अपने आसपास के क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधे लगाएं ताकि भविष्य में कभी भी ऑक्सीजन की कमी महसूस नहीं हो।
सांगानेर के वाटिका स्थित गायत्री शक्तिपीठ, किरण पथ मानसरोवर स्थित चेतना केन्द्र में गायत्री जयंती श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई गई। इनके अलावा सांगानेर, दुर्गापुरा, वैशालीनगर, गांधीनगर, मालवीयनगर, विद्याधरनगर सहित अन्य चेतना केन्द्रों पर संक्षिप्त आयोजन हुए।
