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OMG ! जिसका कर दिया अंतिम संस्कार वह जिंदा लौट आया

राजसमंद। परिजनों ने जिस व्यक्ति का बाकायदा अंतिम संस्कार कर पिंडदान कर दिया, वह नौ दिन बाद 23 मई को जिंदा लौट आया। उसके बेटे-भाई, सब चौंक गए। परिवार में खुशी का ठिकाना न रहा। घर में पसरा सन्नाटा अचानक खुशियों में बदल गया। यह घटना है राजस्थान के राजसमंद की। पुलिस ने किसी दूसरे का शव ओंकारलाल को बताकर उनके परिजनों को सौंपा था वहीं ओंकारलाल जिंदा निकला।

पुलिस की लापरवाही आई सामने

हुआ यूं कि पुलिस को 11 मई को मोही रोड पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। उसे 108 एंबुलेंस से आरके जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। बाद में जिला अस्पताल प्रशासन ने कांकरोली पुलिस को पत्र भेजकर उसकी पहचान के लिए कहा। पुलिस ने पहचान के प्रयास किए, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका।

इसके बाद 15 मई को हेड कांस्टेबल मोहनलाल अस्पताल पहुंचे, जहां सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के आधार पर पुलिस ने कांकरोली के विवेकानंद चौराहा निवासी ओंकार लाल के भाई नानालाल और परिजनों को बुला लिया। नानालाल ने पुलिस को बताया था कि उसके भाई ओंकारलाल के दाएं हाथ में कलाई से लेकर कोहनी तक लंबा चोट का निशान है। बाएं हाथ की दो अंगुलियां मुड़ी हुई हैं।

इस आधार पर अस्पताल में पड़े अज्ञात व्यक्ति के शव को पुलिस ने ओंकारलाल का शव बता दिया। साथ ही, अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने हवाला दिया कि शव 3 दिन पुराना है। फ्रिज में रखा है। इसलिए हाथ के निशान मिट गए हैं। इतना कहते हुए बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव ओंकारलाल के परिजनों को पुलिस ने सौंप दिया।

परिवार वाले रह गए हैरान

परिजनों ने बताया कि ओंकारलाल के बेटों ने सर मुंडवाकर 15 मई को ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। अंतिम संस्कार के दौरान निभाई जाने वाली हर विधि को पूरा किया गया था। परिवार में गम का माहौल था। इस बीच, 23 मई को ओंकारलाल के घर पहुंचने पर परिजन हैरान रह गए।

ओंकारलाल घर वालों को बताए बिना चला गया था

ओंकारलाल ने बताया कि वो 11 मई को अपने परिजनों को बिना बताए उदयपुर चला गया था। वहां उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उदयपुर के अस्पताल में 4 दिन भर्ती रहकर ओंकार ने अपना इलाज करवाया। इस दौरान उसके पैसे खत्म हो गए। इसकी वजह से 6 दिन तक उदयपुर में ही भटकता रहा। 10 दिन बाद रविवार को राजसमंद लौटा।

पता नहीं किसका हुआ अंतिम संस्कार

शासन प्रशासन की लापरवाही से जहां ओंकार के परिजन 10 दिन तक मातम मनाते रहे, वहीं अब तक यह भी पता नहीं चल पाया है कि आखिर ओंकार के परिजनों ने किस व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार किया था।

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