झुंझुनूं। तीन डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 6 साल के बच्चे की मौत हो गई। उसे कुत्ते ने काट लिया था। रेबीज का इंजेक्शन दिए बिना ही इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने दवा देकर घर भेज दिया। धीरे-धीरे बच्चे की तबीयत बिगड़ती चली गई और उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों की लापरवाही पर बच्चे के पिता ने झुंझुनूं कोतवाली में पिछले साल जनवरी में ही रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद सीएमएचओ छोटे लाल गुर्जर की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई। एक साल बाद रिपोर्ट आई, जिसमें सरकारी अस्पताल के तीन डॉक्टरों को दोषी पाया गया है। यह साफ हो गया है कि इन्हीं डॉक्टरों की लापरवाही ने बच्चे की जान ले ली। रविवार देर रात तीनों डॉक्टरों के खिलाफ FIR कर ली गई है।
जानकारी के अनुसार पुलिस विभाग में कार्यरत कॉन्स्टेबल शैतान राम मीणा का बेटा प्रिंस 21 दिसंबर 2020 को घर के बाहर खेल रहा था। दोपहर करीब 3:30 बजे एक कुत्ते ने प्रिंस का मुंह नोंच लिया। परिजन झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल लेकर आए। यहां इमरजेंसी में डॉ. नेमीचंद कुमावत को दिखाया। उन्होंने वहां से नर्सिंग स्टाफ को दिखाने को कहा। वहां से उसे दवा दे दी। ड्यूटी पर तैनात डॉ. कुमावत ने रेबीज का इंजेक्शन लगाए बिना ही भेज दिया। दूसरे दिन तबीयत बिगड़ी तो सर्जन गौरव बुरी को दिखाया। उन्होंने रेबीज का इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन सिरम नहीं लगाई। प्रिंस की तबीयत बिगड़ते देख मां-बाप परेशान हो गए। बीडीके अस्पताल में ही तैनात डॉ. विनय जानू को भी दिखाया, लेकिन उन्होंने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।
4 जनवरी 21 को बारिश होने के बाद प्रिंस की तबीयत बिगड़ गई। बच्चे को तड़पता देख मां-बाप उसे जयपुर ले आए। यहां उसकी 9 जनवरी 21 को मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद शैतान राम ने झुंझुनूं कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया। सीएमएचओ छोटे लाल गुर्जर की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई। एक साल बाद कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि डॉ. नेमीचंद कुमावत, डॉ. गौरव बुरी और डॉ. विनय जानू की लापरवाही से प्रिंस की मौत हुई थी। उसे समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच सकता था।
