जोधपुर : जोधपुर का प्रसिद्ध मथुरादास माथुर अस्पताल (MDM) में भी इलाज के लिए दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। यहां पर डॉक्टरों के नाम ले दलाल लोगों से रुपए वसूल कर ठगी कर रहे हैं। ऐसे ही एक दलाल को ACB ने शनिवार को 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
ACB को ठग ने बताया कि यह राशि उसने MDM हॉस्पिटल के दो न्यूरोसर्जन के लिए ली थी। इधर जब डॉक्टरों को पता चला कि उनका नाम दलाल ने लिया है तो वो खुद थाने पहुंच उस दलाल पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गसिंह राजपुरोहित ने बताया कि बाड़मेर जिले सेड़वा गांव निवासी गुणेशराम ने शिकायत दर्ज कराई कि मेरे एक रिश्तेदार मांगीलाल मथुरादास माथुर अस्पताल (MDM) के न्यूरो सर्जरी विभाग में 19 जुलाई को भर्ती कराया गया। उसके सिर का ऑपरेशन होना है। ऑपरेशन कराने के लिए एक दलाल बिलाड़ा तहसील निवासी सुनील विश्नोई चार हजार रुपए की मांग कर रहा है।
दलाल ने ACB को बताया कि राशि वो न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. सुनील गर्ग व डॉ. शरद थानवी के लिए ले रहा है। शिकायत का सत्यापन 23 जुलाई को किया गया। इसमें पुष्टि हो गई कि दलाल सुनील विश्नोई चार हजार रुपए की मांग कर रहा है। शनिवार सुबह गुणेशाराम को चार हजार रुपए के साथ दलाल सुनील के पास भेजा गया। ACB कि टीम अस्पताल के पास दबिश देने के लिए तैयार थी जैसी ही दलाल आया और पीड़ित ने उसे चार हजार थमाते ही पहले से तैयार एसीबी की टीम ने ट्रैप कर लिया। उसकी जेब से रंग लगे चार हजार रुपए बरामद कर लिए गए। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। दोनों डॉक्टरों की भूमिका के बारे में पता लगाया जा रहा हैं।
दलालों से MDM अस्पताल के डॉक्टर भी परेशान
डॉ सुनील गर्ग से जब पूछा गया कि रिश्वत के मामले में पकड़े गए दलाल की तरफ से उनका नाम लिया गया है तो उन्होंने कहा कि मैं खुद हैरान हूं। न तो मैं कभी ऐसे किसी व्यक्ति से मिला और न ही मैं उसे जानता हूं। उनका कहना है कि लैब से लेकर वार्ड तक में इनकी घुसपैठ मची हुई है। हम लोग मरीजों की जांच कर उनका ऑपरेशन करे या फिर इन दलालों से निपटे। मरीज को पूरी तरह से अपने झांंसे में फांस लेते हैं ये लोग। बीस साल हो गए है मेरी नौकरी को। कभी किसी ने मुझ पर ऐसा लांछन नहीं लगाया। मेने खुद उस दलाल के खिलाफ थाने जा FIR दर्ज कराई है ।
दलाल मरीजों को कैसे फांसते है
अस्पताल में दलाल का समूह सक्रिय रहता है। वे मरीज के अंदर और बाहर जाने पर नजर रखता है जैसे ही कोई लगता है मरीज फांसने के लिए वो अपना जाल बिछा देते हैं। सबसे पहले मरीजों को सभी डॉक्टरों तक अपनी पहुंच का हवाला दिया जाता है। इसके बाद में मरीज की स्ट्रेचर तक ये लोग खींच कर वार्ड तक पहुंचाने में मदद करते हैं। मरीज के परिजनों को पूरी तरह से अपनी बातों में उलझा कर फांस लेते हैं। ये लोग डॉक्टरों तक पैसा पहुंचाने के नाम पर मरीज के परिजनों से मोटी रकम वसूल करना शुरू कर देते हैं।
