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विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री हर कोई दुखी: गडकरी

विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री हर कोई दुखी: गडकरी

जयपुर: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि समस्या सबके साथ है। पार्टी के भीतर और बाहर सब जगह समस्या है। हर कोई दुखी है। एमएलए इसलिए दुखी है कि मंत्री नहीं बने। मंत्री बन गए तो इसलिए दुखी हैं कि अच्छा विभाग नहीं मिला और जिन मंत्रियों को अच्छा विभाग मिल गया, वे इसलिए दुखी हैं कि मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। मुख्यमंत्री इसलिए दुखी हैं कि पता नहीं कब तक रहेंगे।

गडकरी सोमवार को विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र और जन अपेक्षाएं विषय पर सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-भाजपा अध्यक्ष रहते मुझे ऐसा कोई नहीं मिला, जो दुखी न हो। मुझसे एक पत्रकार ने पूछा- आप मजे में कैसे रह लेते हैं। मैंने कहा कि मैं भविष्य की चिंता नहीं करता, जो भविष्य की चिंता नहीं करता वह खुश रहता है।
वन डे ​क्रिकेट की तरह खेलते रहो। मैंने सचिन तेंलुकर और सुनील गावस्कर से छक्के चौके लगाने का राज पूछा तो बोले कि यह स्किल है। इसी तरह राजनीति भी एक स्किल है।

जीवन में लड़ते रहना चाहिए

गडकरी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को वाटरगेट कांड के बाद पद छोड़ना पड़ा था। राष्ट्रपति से हटने के बाद लोगों ने कॉलोनी में रहने को घर नहीं दिया था। निक्सन ने लिखा था कि आदमी हारने से समाप्त नहीं होता, नहीं लड़ने से समाप्त होता है। हमें तो जीवन में लड़ना है। कभी-कभी हम सत्ता में होते हैं, कभी विपक्ष में। यह चलता रहता है। जो ज्यादा विपक्ष में रहते हैं, वे सत्ता में जाकर ​भी विपक्ष जैसा व्यवहार करते हैं। ज्यादा सत्ता में रहने वाले विपक्ष में रहकर भी सत्ता जैसा ही व्यवहार करते हैं। उनकी आदत पड़ जाती है।

मुझे कांग्रेस में शामिल होने की सलाह दी गई थी

गडकरी ने कहा- नागपुर से कांग्रेस नेता डॉ. श्रीकांत मेरे अच्छे मित्र थे। उन्होंने 17 से ज्यादा विषयों में पीजी कर रखी थी। मैं उस वक्त चुनाव हार गया था और उस वक्त भाजपा की स्थति आज जैसी नहीं थी। उन्होंने मुझसे तब कहा कि नितिन तुम अच्छे हो, लेकिन तुम्हारी पार्टी का भविष्य नहीं है। तुम कांग्रेस में आ जाओ। मैंने उन्हें विनम्रता से मना कर दिया। उतार-चढाव चलते रहते हैं, लेकिन आपको विचारधाारा के प्रति लॉयल रहना चाहिए।

गरीब को राहत देने के लिए कानून तोड़ना पड़े तो तोडना चाहिए

केन्द्रीय सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा हैं कि यदि गरीब को राहत देने के लिए कानून तोड़ना पड़े तो वे तोडेंगे।लोगों की भावनाओं को जीतकर आगे जाना ही लीडरशिप है। उन्होंने कहा कि ई— रिक्शा को शुरू करने के पीछे भी उनकी यहीं सोच थी। उन्होंने कहा कि एक आदमी दूसरे को खींचे, यह शोषण है। इसी सोच के साथ ई रिक्शा शुरू कराया था।

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