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अम्बुजा प्लांट की पर्यावरण अनापत्ति रद्द करने व सांभर झील के संरक्षण की मांग उठी लोक सभा मे, बेनीवाल बोले विकास कार्यो में नही हो पर्यावरण से समझौता

अम्बुजा प्लांट की पर्यावरण अनापत्ति रद्द करने व सांभर झील के संरक्षण की मांग उठी लोक सभा मे, बेनीवाल बोले विकास कार्यो में नही हो पर्यावरण से समझौता लोक सभा मे गूंजा राजस्थान के सीबीआई में लंबित प्रकरणो का मामला, सांसद बेनीवाल बोले- न्याय देरी से मिलना भी अन्याय

दिल्ली/जयपुर: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शुक्रवार को लोक सभा मे जलवायु परिवर्तन पर नियम 193 पर हुई चर्चा में भाग लिया। सांसद ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े कई मुद्दों को उठाते हुए प्रकृति व प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण की मांग उठाई।

इन पर किया ध्यान आकर्षित

सांसद बेनीवाल ने नदियों में बढ़ते प्रदूषण व उनके अस्तित्व पर आ रहे संकट पर बोलते हुए पहाड़ों के संरक्षण का मुद्दा उठाया और उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में आपदाओं के बाद हमेशा ही नदियों पर बने बड़े बांधों और पॉवर प्रोजेक्ट्स पर उंगली उठती रही है। सुप्रीम कोर्ट तक इस पर चिंता जता चुका है, यहां तक कि केंद्र सरकार का अपना जल संसाधन मंत्रालय 2016 में सुप्रीम कोर्ट के सामने मान चुका है कि उत्तराखंड में गंगा पर कोई भी नया पॉवर प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद उत्तराखंड राज्य के 39 में से 24 पॉवर प्रोजेक्ट्स पर रोक लगा दी थी, सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर, 2014 को इस मामले में पूछा था कि अगर इन पॉवर प्रोजेक्ट्स से वन और पर्यावरण को खतरा है। तो इन्हें रद्द क्यों नहीं किया जा रहा? उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती, जिन्होंने इन्हें मंजूरी दी?

सांसद ने कहा कि विकास योजनाओं में पर्यावरण से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने हिमालय को बचाने के लिए पहाड़ो को बचाने के लिए गंभीर होना पड़ेगा। बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान के जयपुर में स्थित रामगढ़ बांध का अस्तित्व संकट में है। रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र में नेताओ व अधिकारियों तथा उनके संरक्षण में कई लोगो ने अतिक्रमण कर लिए। जिसे हटाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे,क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश व कोर्ट के आदेशों की अवमानना से जुड़ी याचिकाओं के बाद भी वहां से अतिक्रमण नही हट रहा है।

उन्होंने वन क्षेत्र के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए जोधपुर के बेरीगंगा के संरक्षीत वन क्षेत्र में खनन की अनुमति के लिए आई 200 से अधिक पत्रावलियों की मंजूरी नही देने की मांग की साथ ही उन्होंने पहाड़ों के संरक्षण व हिमालय को बचाने की मांग उठाई। साथ ही पंजाब की तरफ से राजस्थान में आने वाली नहरों में गंदे पानी को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा पंजाब के लुधियाना में कांग्रेस के नेताओ की शराब की फैक्ट्रियों से राजस्थान की नहरो में आने वाले गंदे पानी से नहरो में होने वाले प्रदूषण की तरफ भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। सांसद ने कहा नहरो के पानी से कैंसर जैसी गंभीर बीमारिया हो रही है। उन्होंने 26 हजार टन कोविड के कचरे से महासागरों में फैले प्रदूषण की तरफ भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

यह कहा अम्बुजा व साम्भर झील को लेकर

सांसद ने कहा कई शौध रिपोर्ट ने यह बताया है की सीमेंट निर्माण इकाइयो से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (CO2) में लगभग 7% का योगदान पाया गया है। जो दुनिया भर के सभी ट्रकों द्वारा किये गए CO2 उत्सर्जन से भी अधिक है। सीमेंट इकाइया न केवल पृथ्वी के तापमान मे बढ़ोातरी करती है बल्कि मृदा क्षरण व जल प्रदूषण भी इनसे होता है।

उन्होंने कहा की एक तरफ कुछ लोग किसानो पर पराली जलाने का मुद्दा बनाकर प्रदूषण के लिए उन्हे ज़िम्मेदार ठहरा देते है। दूसरी तरफ प्रदूषण के असली कारको पर कार्यवाही तक नही की जाती जो सरकारों की दोहरी नीति का उदाहरण है। उन्होंने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इसका सन्दर्भ मे मंत्री एक तरफ जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रधानमंत्री गंभीर रहते है दूसरी तरफ प्रदूषण पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव के जो कारक है उनके विरुद्ध ज़िम्मेदारी के साथ संज्ञान नही लिया जाता है।

उन्होंने नागौर संसदीय क्षेत्र नागौर की नगरपालिका क्षेत्र मुंडवा मे स्थापित किए गये अंबुजा सीमेंट प्लांट इकाई द्वारा झूठे तथ्यो के आधार पर ली गई। पर्यावरण अनापति के सम्बन्ध मे आकर्षित बोलते हुए कहा की उक्त कंपनी ने नगरपालिका सीमा से निर्माण इकाई की स्थिति, जल की उपलब्धता, जैव विविधता, लैंड यूज एवम् लैंड कवर तथा कृषि पर होने वाले हानिकारक प्रभाव के आंकलन मे कई-कई विसंगतिया पाई गई और एक एक बिंदु से पूरे तथ्यो के साथ पूर्व मंत्री जावड़ेकर को अवगत करवाया।

उन्होने जाँच के आदेश तो दिए लेकिन जिन्होने जाँच की उन्होने उस सीमेंट इकाई का निर्माण पूरा होने तक ढिलाई की व जाँच रिपोर्ट कंपनी के पक्ष मे रख दी। उन्होने मामले में पुनः जांच करवाने की बात कही, और कहा कि सीमेंट कंपनी चाहे कितनी बड़ी हो सरकार से बड़ी नही है। नियमो से बड़ी नही है और इस अंबुजा के साथ हम यदि ऐसी सीमेंट इकाइयों की पर्यावरण अनापत्ति रद्द करेंगे तब एक संदेश जाएगा। अन्यथा यहाँ भाषण देकर केवल समय व्यतीत करने से पर्यावरण संरक्षण नही हो पाएगा। उन्होंने राजस्थान में स्थित विश्व प्रसिद्ध साम्भर झील के संरक्षण की मांग उठाते हुए उक्त झील सहित राजस्थान में प्रवासी पक्षियों की हो रही मौतों की तरफ भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया व सांभर झील से अतिक्रमण हटाने की मांग की तथा वन्य जीवों के संरक्षण की मांग उठाई।

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