पेयजल जलाशयों की सफाई व्यवस्था होगी कम्प्यूटरीकृत, जयपुर सहित अन्य स्थानों पर बदलेगी 2583 किमी पुरानी व क्षतिग्रस्त पाइपलाइन – एसीएस डॉ. अग्रवाल

- शुद्ध व गुणवत्तायुक्त पेयजल उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता
- 33769 जलाशयों की साफ-सफाई की होगी मोनेटरिंग व्यवस्था चाकचोबंद

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पेयजल जलाशयों की सफाई व्यवस्था होगी कम्प्यूटरीकृत, जयपुर सहित अन्य स्थानों पर बदलेगी 2583 किमी पुरानी व क्षतिग्रस्त पाइपलाइन - एसीएस डॉ. अग्रवाल

जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, माइंस एवं पेट्रोलियम डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा है कि प्रदेशवासियों के लिए पेयजल वितरण के सभी 33769 जलाशयों की समयवद्ध सफाई सुनिश्चित करने के लिए कम्प्यूटरीकृत मोनेटरिंग व्यवस्था व्यवस्था सुनिश्चत की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदूषित पानी की समस्या को देखते हुए संबंधित जिलों की 2583 किमी से अधिक की पुरानी व क्षतिग्रस्त पाइपलाइन चिन्हित की गई है जिसमें से 886 किमी पाइपलाइन बदलने की स्वीकृति जारी कर दी गई हैं वहीं 1100 किमी पाइपलाइन बदलने के प्रस्ताव अतिशीघ्र तैयार किये जा रहे हैं वहीं 596 किमी पाइपलाइन बदलने के प्रस्ताव भी तैयार कर राज्य सरकार को प्रेषित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

एसीएस पीएचईडी डॉ. सुबोध अग्रवाल गुरुवार को जल भवन में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को शुद्ध व गुणवत्तायुक्त पेयजल उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 24409 भूतल जलाशय, 4415 स्वच्छ जलाशय और 4939 उच्च जलाशयों से पेयजल वितरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन जलाशयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि तय समय पर साफ-सफाई का कार्य हो सकें।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राज्य के पांच जिलों में करीबन जयपुर में 642 किमी, कोटा में 262 किमी, भरतपुर में 206 किमी, अजमेर में 150 किमी व बूंदी में 150 किमी पुरानी व क्षतिग्रस्त पाईपलाइन चिन्हित की गई है। इसके अतिरिक्त भरतपुर में 130 किमी, कोटा में 91 किमी, बूंदी में 86 किमी, धौलपुर में 73 किमी और डूंगरपुर में 50 किमी पाइपलाइन बदली जानी है। उन्होंने बताया कि इसमें से 886.95 किमी पाइपलाइन बदलने की स्वीकृति जारी कर दी गई है वहीं पर 1100.3.0 किमी पाइपलाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में शेष 595.91 किमी पाइपलाइन बदलने के प्रस्ताव तत्काल तैयार कर प्रेषित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

एसीएस डॉ. अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए। उन्होंने फील्ड में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों व विभाग के अधिकारियों को फील्ड में दौरे के दौरान पानी की गुणवत्ता, वहां जेजेएम सहित विभिन्न योजनाओं में चल रहे कार्यों की गुणवत्ता और अन्य आवश्यक बिन्दुओं की भी समीक्षा करें और कार्यालयों के साथ ही फील्ड में जाएं। उन्होंने कहा कि आमनागरिकों को अवेयर करने के लिए सीधा संवाद कायम करें और आवश्यकतानुसार स्थानीय जिला जनसंपर्क कार्यालयों के सहयोग से मीडिया के माध्यम से सकारात्मक प़क्ष को भी प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाएं।

समीक्षा बैठक में मिशन निदेशक जेजेएम अविचल चतुर्वेदी, संयुक्त सचिव राम प्रकाश, उप सचिव पीएचईडी गोपाल सिंह, मुख्य अभियंताओं में जेजेएम व ग्रामीण आरके मीणा, शहरी व एनआरडब्लू केडी गुप्ता, विशिष्ठ परियोजना दिनेश गोयल, प्रशासन राकेश लुहाडिया तकनीकी डीके गौड, तकनीकी सहायक शुभांशु दीक्षित व वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही फील्ड के अधिकारियों ने वर्चुअली हिस्सा लिया।

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