Headlines

स्कूल में छात्र की पिटाई से हुई मौत के मामले में बाल आयोग ने लिया संज्ञान

स्कूल में छात्र की पिटाई से हुई मौत के मामले में बाल आयोग ने लिया संज्ञान

जयपुर: प्रदेश के चूरू जिले में शिक्षक द्वारा 7th क्लास के 13 वर्षीय गणेश को होमवर्क पूरा न करने पर पीट-पीट कर हत्या करने वाले मामले को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लिया है। बाल आयोग अध्यक्ष संगीता बेनीवाल का कहना है कि शिक्षक द्वारा छात्र को होमवर्क नहीं करने पर इस तरह की सजा देना बहुत ही दर्दनाक और निंदनीय मामला है। स्कूलों में कॉर्पोरल पनिशमेंट के तहत बच्चे में अनुशासन स्थापित करना गलत है। इसके कारण बच्चों की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है और बच्चे अवसाद में चले जाते है।

बाल आयोग पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है। आरोपी शिक्षक के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और अन्य प्रावधानों के अनुसार एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस द्वारा जांच प्रारम्भ कर दी गई है। वहीं इस प्रकार की दर्दनाक घटना की पुनरावृति ना हो इसके हेतु बाल आयोग द्वारा जल्द से जल्द शिक्षा विभाग को किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार विशेष निर्देश एवं गाइड लाइन जारी की जाएगी।

बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है

मनोचिकित्स्क डॉ. अनीता गौतम का कहना है कि जिन बच्चों को गलती करने पर प्यार से समझाने के बजाए पीटा जाता है, वो मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। ऐसे बच्चे या तो बिल्कुल चुप रहने लगते हैं, अवसाद में चले जाते हैं या हिंसक हो जाते हैं। बच्चों को पीटने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। बच्चों में आत्मग्लानि की भावना बहुत जल्दी आ जाती है। अवसाद इतना बढ़ जाता है कि ये बच्चे आत्महत्या तक कर लेते हैं।

क्या है कॉर्पोरल पनिशमेंट

शिक्षण संस्थानों में बच्चों के बीच अनुशासन बनाए रखने के नाम पर जो सबसे ज्यादा प्रचलित कुप्रथा रही है वह है शारीरिक व मानसिक दंड (कॉर्पोरल पनिशमेंट) देने की। इसमें बच्चों के बीच अनुशासन के लिए शारीरिक और मानसिक दंड को आवश्यक समझा जाता है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *