जिला स्तरीय गौशाला-नंदीशाला योजना को 50 लाख से बढ़ाकर 3 करोड़ किया जाएगा, अंधे-अपाहिज पशुओं के लिए अब 12 माह का भरण पोषण अनुदान

  • गोपालन विभाग की मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय
  • पंचायत समिति स्तर पर गौशालाओं के लिए न्यूनतम भूमि 20 से घटाकर 10 बीघा
  • तीन साल के पंजीयन की अनिवार्यता होगी समाप्त

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नंदीशाला

जयपुर। राज्य में नंदी शालाओं के लिए पंचायत समिति स्तर पर 20 बीघा के स्थान पर 10 बीघा और ग्राम पंचायत स्तर पर पांच बीघा भूमि की आवश्यकता तय की जाएगी वहीं पूर्व बीजेपी सरकार के समय जिला स्तरीय नंदीशालाओं की योजना को 50 लाख रु. से बढ़ाकर अब 3 करोड़ रु. करने पर सहमति बनी है। नंदीशालाओं और गौशालाओं की स्थापना की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही अपाहिज व अंधें गोवंश के लिए भरण पोषण अनुदान 9 माह के स्थान पर 12 माह करने का निर्णय किया गया है। यह सहमति बुधवार को सचिवालय में राज्य सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश की समस्या के निराकरण हेतु पंचायत व ग्राम पंचायत स्तर पर नंदीशालाओं व गौशालाओं की स्थापना की योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने और आ रही कठिनाइयों के निराकरण व नवाचारोें को अपनाने के लिए स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में बनी है।

मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में खान व गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया, जलदाय मंत्री महेश जोशी, पशुपालन मंत्री लाल चंद कटारिया और राजस्व मंत्री राम लाल जाट के साथ ही गोपालन सचिव पीसी किशन और निदेशक गोपालन लाल सिंह ने हिस्सा लिया। खान व गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि उपसमिति के सदस्यों ने एक स्वर में नंदीशालाओं व गौशालाओं की स्थापना व संचालन को और अधिक आसान बनाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिला कलक्टरों को सिवायचक भूमि गौषालाओं के लिए आवंटन के लिए अधिकृत करने और चरागाह भूमि पर न्यायालयोें में लंबित प्रकरणों में सरकार का पक्ष प्रभावी तरीके से रखने पर जोर दिया गया। इसी तरह से गौशालाओं व नंदीशालाओें की स्थापना के लिए तीन साल के रजिस्ट्रेशन की शर्त को हटाने, भूमि के चोकोर ना होने पर भी उपलब्ध भूमि के आधार पर नक्शें पारित करने, संस्थाओं को संस्था चयन की निविदा में ऑफलाइन प्रक्रिया व आवेदन के आधार पर भाग लेने की छूट देने का निर्णय किया गयां।

बैठक में नंदीशालाओं व गौशाला योजनाओं को आरटीपीपी नियमों में शिथिलता के लिए वित विभाग को प्रस्ताव भेजने का निर्णय किया गया। मंत्री भाया ने बताया कि अपाहिज और अंधे गोवंश के भरण पोषण के लिए अब 9 माह के स्थान पर 12 माह अनुदान दिया जाएगा वहीं पशु पक्षियों व गोवंश को समर्पित निजी संस्थानों को एकमुश्तिय सहायता के लिए निर्माण कार्य, आवश्यक उपकरण व औषधि उपलब्ध कराई जाएगी। उपसमिति की बैठक में नवाचारोें के प्रस्ताव वित विभाग से अनुमोदित कराकर लागू करने का निर्णय किया गया वहीं नंदीशालाओें व गौवंश के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे पुनित कार्य को और अधिक व्यावहारिक बनाते हुए लाभान्वित करने का निर्णय किया गया।

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