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डेयरी विकास में जिला डेयरी संघ अध्यक्षों की तय होगी सक्रिय भूमिका

जयपुर। गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने कहा है कि राज्य के समग्र डेयरी विकास में जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के अध्यक्षों की सक्रिय भूमिका तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला दुग्ध संघों के अध्यक्षों से अनवरत संवाद कायम कर उनकी समस्याओं, सुझावों व अनुभवों को साझा किया जाएगा।

गोपालन मंत्री भाया ने जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के अध्यक्षों को पत्र लिख कर राज्य में सहकारी डेयरी आंदोलन से प्रदेश के पशुपालकों को अधिक से अधिक संख्या में जोड़ने, दूध संकलन बढ़ाने, उन्हें लाभकारी मूल्य दिलाने और डेयरी समितियों व डेयरी संघों के सामने आ रही समस्याओं और उनके समाधान के विकल्पों से अवगत कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अनवरत संवाद व अनुभवों को साझा करने से डेयरी आंदोलन के सामने आ रही समस्याओं का समय पर समाधान खोजा जा सकेगा वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भावना के अनुसार गांव गांव , ढ़ाणी-ढ़ाणी के पशुपालकों को जोड़ने की कार्ययोजना बनाई जाएगी।

नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन

भाया ने कहा कि ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में खेती और पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका होने से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों समीक्षा बैठक में डेयरी नेटवर्क को आगे बढ़ाने पर बल दिया है। मुख्यमंत्री गहलोत ने बैठक के दौरान अधिक से अधिक ग्रामीण युवाओं को खेती के साथ ही पशुपालन से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा गांवों में नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन की कार्य योजना तैयार की जा रही है।

गोपालन मंत्री भाया ने कहा कि डेयरी संघों के अध्यक्षों से संवाद व समन्वय बनाकर मुख्यमंत्री गहलोत की मंशा के अनुसार डेयरी नेटवर्क को ग्राम स्तर तक जोड़ने के लिए एक्सन प्लान बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के सहकारी डेयरी आंदोलन को देश का अग्रणी आंदोलन बनाने और समूचे देश में डेयरी उत्पादों की पहुंच और पहचान बनानी होगी।
गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने पिछले दिनों डेयरी संघों के अध्यक्षों और अधिकारियों से वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से विस्तार से चर्चा की और सुझाव प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि हमें एक और पशुपालन को बढ़ावा देना हैं वहीं शहरी उपभोक्ताओं तक डेयरी उत्पादों की सहज पहुंच बनानी है। उन्होंने कहा कि डेयरी संघों से संवाद, सुझाव व अनुभवों को साझा करने का कार्य अनवरत रुप से जारी रहेगा ताकि सहकारी डेयरी आंदोलन को गति दी जा सके।

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