नेट-थियेट पर 20 साल बाद गूंजे चुन्नी जयपुरी के लोकगीत

लोकगीत

जयपुर। नेट-थियेट के कार्यक्रमों की श्रृंखला में राजस्थान की सुप्रसिद्ध लोक-गायिका चुन्नी जयपुरी ने जब अपने अंदाज में राजस्थानी लोकगीतों पेश किया तो मधुर गायन से दर्शकों को सराबोर किया। नेट-थियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि चुन्नी जयपुरी देश-विदेश के बडे-बडे मंच पर श्रौताओं का मन मोहा है यह पहली बार था जब नेट-थियेट के लाइव मंच के माध्यम से लगभग 20 वर्ष बाद दर्शकों से जुडी। राजस्थान में हुयी इस वेब रंगमंच की शुरूआत और इसके दो साल के सफर के बारे मे जानकर अविभूत हुयी। चुन्नी जयपुरी ने कार्यक्रम के शुरूआत महलाँ में भूल्याई म्हारी सूरमा की ड़ाबी से की।

राजस्थान का लोकप्रिय लोकगीत नीम की निंबोळी म्हारे अड़अड़ जाय गीत सुनाया तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। इसके बाद जीजा साली की मस्ती मजाक को लेकर जीजाजी थारा तोलीया के हीरा मोती लटके नादान साली को मन भटके से और जीजा साली पर ही आधारित दूसरे गीत सुनतो जाजे रे जीजाजी म्हारी बातड़ली से दर्शकांे को मदमस्त बना दिया। अंत में ओ मारवाड़ को छेलो कलकत्ते जाकर बसग्यो गा कर माहौल को लोकमयी बना दिया। कार्यक्रम का संचालन आर. डी अग्रवाल ने किया। हारमोनियम पर शेरखान और ढोलक पर हनुमान सहाय की असरदार संगत ने लोकगीतों के इस कार्यक्रम में चारचॉद लगा दिये। तबला अमानत अली सूजास, हारमोनीयम शब्बिर खा सूजास, सरंगी फिरस्तस अली सूजास कैमरा जितेन्द्र शर्मा, प्रकाश मनोज स्वामी, मंच सज्जा घृति शर्मा, अंकित शर्मा नोनू और जीवितेश शर्मा संगीत विष्णु जांगिड, का रहा।

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