जयपुर। वृहद राजस्थान का निर्माण हो जाने के बावजूद मत्स्य संघ का पृथक अस्तित्व था। इसका कारण था कि अलवर और करौली रियासते तो एकमत से राजस्थान में शामिल होने के लिए तैयार थी, लेकिन धौलपुर और भरतपुर इस असमंजस में थी कि वे उत्तरप्रदेश में शामिल हो अथवा राजस्थान में।
गांव-गांव जा लोगों से ली थी राय
बताते हैं कि रियासती मामलों के मंत्री वी.पी. मेनन ने इनके नरेशों से बातचीत की, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। फलत: शंकर राव देव की अध्यक्षता में प्रभुदयाल हिम्मतसिंहका और आर.के. सिधवा की समिति की गठित की गई,जिसने गांव-गांव में घूमकर तथा सार्वजनिक संस्थाओं से साक्ष्य एकत्रित कर रियासती मंत्रालय को राजस्थान के पक्ष में सिफारिश प्रस्तुत की।
15 मई 1949 को हुआ था विलय
इस आधार पर एक मई, 1949 को भारत सरकार ने मत्स्य संघ को राजस्थान में मिलाने के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी और 15 मई 1949 को मत्स्य संघ राजस्थान का अंग बन गया। इस परिवर्तन के फलस्वरूप मत्स्य के प्रधानमंत्री शोभाराम को वृहद राजस्थान के प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल कर लिया गया।आपको बता दे मत्स्य संघ देश की आजादी के बाद 18 मार्च 1948 को बना था।

अलवर के ग़ांधी
बाबू शोभाराम विलय के बाद हीरालाल शास्त्री मंत्रिमंडल में राजस्व मंत्री बनाए गए। वे प्रथम व द्वितीय लोकसभा के सदस्य तथा एक बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य तथा उन्हें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। उन्हें प्यार से अलवर का गांधी भी कहा जाता था।
