मेवाड़ के महापराक्रमी महाराणा प्रताप पर जल्द होगा भव्य फिल्म का निर्माण

  • राणा प्रताप के पराक्रम और प्रभुत्व का जीवंत दृश्यांकन करेंगे निर्देशक विक्की राणावत
  • राजस्थान में शीघ्र शुरू होगी शूटिंग
  • मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. राजशेखर व्यास ने लिखी है फिल्म की स्क्रिप्ट
  • निर्देशक राणावत ने तथ्यों को लेकर पिछले दिनों उदयपुर में मेवाड़ के इतिहासकारों के साथ की चर्चा
  • @ राजेन्द्र शेखर व्यास

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बेंगलूरु : सेवन होर्सेस मोशन पिक्चर्स एलएलपी के बैनर तले बनने वाली फिल्म महाराणा प्रताप-हिंदुस्तान का गौरव ऐसी भव्य ऐतिहासिक फिल्म होगी, जिसमें न केवल महाराणा प्रताप के अप्रतिम शौर्य, पराक्रम व स्वाभिमान की गाथा होगी बल्कि दृश्यांकन और प्रभाव ऐसा होगा मानो वे उस काल का जीवंत चित्रण देख रहे हों| फ़िल्म में उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं का भी समावेश होगा, जिसके बारे में आमजन को जानकारी नहीं है| इसमें उस काल का रहन सहन, वेशभूषा आदि परिदृश्य भी प्रभावी तौर पर प्रस्तुत किए जाएंगे| फिल्मांकन ऐसा होगा कि इतिहासवेत्ताओं और शोधार्थियों के लिए अहम होकर इसे बार बार देखने का मन करे| डेढ़ सौ म्यूजिशियन के साथ फ़िल्म के शीर्षक गीत (टाइटल सांग) की रिकार्डिंग लोकप्रिय गायक दलेर मेहंदी की आवाज़ में हो चुकी है| यह बात फ़िल्म के निर्देशक एवं सह-निर्माता विक्की राणावत ने उनसे हुई चर्चा के दौरान कही|

इतिहासकारों के साथ चर्चा

विक्की राणावत ने बताया कि फिल्म के कथानक को लेकर कहीं कोई विरोधाभास न रहे और न ही किसी संबंधित समाज की भावनाएं आहत हों, यह उनकी भावना है| इसी तथ्य को लेकर पिछले दिनों महाराणा प्रताप की नगरी उदयपुर के भूपाल नोबल्स संस्थान स्थित प्रताप शोध प्रतिष्ठान के तत्वाधान में मेवाड़ के ख्यातनाम इतिहासकारों के साथ महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े तथ्यों एवं भौगोलिक स्थलों को लेकर एक परिचर्चात्मक बैठक आयोजित कर इतिहासकारों की राय और सलाह भी ले ली गई है ताकि फिल्म निर्माण में तथ्यों को लेकर कहीं कोई त्रुटि अथवा विरोधाभास न रहे| इस फ़िल्म के निर्माता सुनील जैन, कंवलजीत सिंह राणावत, जितेंद्र बी. वाघड़िया और खुद विक्की राणावत हैं| निर्देशक विक्की राणावत के पुत्र सरल राणावत फ़िल्म के सह निर्देशक हैं|

इन इतिहासकारों ने की बैठक में शिरकत

बैठक में विक्की राणावत के साथ ही भूपाल नोबल्स संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप सिंह पुरावत, परामर्श दाता प्रतापसिंह झाला (तलावदा), बलवंत सिंह झाला, सरल राणावत, गुणवन्तसिंह झाला जैसे मेवाड़ के ख्यातनाम इतिहासकारों ने हिस्सा लिया| इनमें विशेषकर वे इतिहासकार और शोधार्थी शाामिल थे, जिन्होंने महाराणा प्रताप के इतिहास पर शोध कार्य किया है| जिन इतिहासकारों से चर्चा हुई उनमें प्रताप शोध प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. मोहब्बत सिंह राठौड़, प्रो.डॉ.के.एस. गुप्ता, डॉ. देव कोठारी, प्रो. गिरीशनाथ माथुर, डॉ. राजेंद्रनाथ पुरोहित, डॉ.जे.के.ओझा, डॉ. विवेक भटनागर, डॉ. अजय मोची, डॉ.मनीष श्रीमाली, डॉ. भानु कपिल, डॉ.कुलशेखर व्यास, डॉ. जी.एल.मेनारिया, विनोद चौधरी, प्रियदर्शी ओझा आदि शामिल हैं|

इतिहास लेखन करते-करते अपना इतिहास भी खुद लिख गए डॉ. व्यास

विक्की राणावत ने बताया कि उन्होंने महाराणा प्रताप पर करीब 7 साल तक शोध किया है| इसी दौरान मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार, वेदविज्ञानी और रुद्रवीणा वादक डॉ. राजशेखर व्यास से उनकी मुलाकात हुई और फिर उनके साथ फ़िल्म निर्माण को लेकर चर्चाओं का दौर चल पड़ा| इस फ़िल्म की कथा, पटकथा और संवाद लेखन डॉ. राजशेखर व्यास ने ही किया है| इसी बीच यकायक उनका स्वास्थ्य खराब हो गया और वे अस्पताल में भर्ती रहे| अस्पताल की शैया पर भी वे स्क्रिप्ट का परिमार्जन करते रहे| 15 दिन इलाज के बाद आखिर उन्होंने देह त्याग दी| किन्तु ब्रह्मलीन होने से पूर्व उन्होंने स्क्रिप्ट लगभग पूरी लिख दी थी| राणावत ने बताया कि गुरुजी डॉ. व्यास ने अस्पताल के आईसीयू में फिल्म का क्लाइमैक्स लिखा और इसकेदो दिन बाद ही देह त्याग दी| मानो वे इसके लिए ही जिंदा थे और अपनी कलम से फिल्म के ऐतिहासिक दृश्यों का लेखन करते-करते वे खुद इतिहास बन गए|

लेखक डॉ. राजशेखर व्यास उनके अंतिम दिनों में हॉस्पिटल में फिल्म की पटकथा को अन्तिम रूप देते हुए|
मंथन, सर्वसम्मति के बाद तथ्यों पर सहमति

फ़िल्म निर्देशक राणावत ने बताया कि वे खुद एक-एक प्रश्न इतिहासकारों के समक्ष रखते गए और सभी ने ऐतिहासिक ग्रंथों और शोध के आधार पर प्रातःस्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह के जीवन के विविध पक्षों का बारीकी से विश्लेषण करते हुए अपना पक्ष रखा, मंथन हुआ औऱ सर्वसम्मति के आधार पर तथ्यों पर सहमति जताई| राणावत के साथ ही सलाहकार झाला मान के वंशज प्रतापसिंह तलावदा ने बताया कि महाराणा प्रताप पर एक ऐसी ऐतिहासिक और वास्तविकता से ओतप्रोत फिल्म बनेगी जो पुख्ता तथ्यों पर आधारित होकर निर्विवाद होगी| फिल्म की ज्यादातर शूटिंग उन ऐतिहासिक वन क्षेत्र में होगी, जहां मेवाड़ मुकुटमणि महाराणा प्रताप ने संघर्ष का दौर गुजारा और ऐतिहासिक युद्ध लड़े| फिल्म में महाराणा प्रताप के जन्म काल से लेकर उनके देवलोक गमन तक के सफर को बारीकी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा|

शूटिंग में होगा वीएफएक्स तकनीक का इस्तेमाल

राणावत ने बताया कि फिल्म में महाराणा प्रताप के जीवन के ऐसे अनछुए पहलुओं को प्रस्तुत किया जाएगा जिनके बारे में आम आदमी को पता ही नहीं है| फ़िल्म शूटिंग में वीएफएक्स (विजुअल इफेक्ट्स) का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि 500 साल पुराना परिदृश्य और प्रभाव जीवंत किया जा सके| इतिहास धीरे धीरे पाठ्यक्रमों से कम होता जा रहा है| प्रयास रहेगा कि उसको फ़िल्म में दिखाया जा सके| 500 साल का इतिहास 3 घंटे में बता पाना असंभव है, फिर भी उनके जीवन के अधिकतर घटनाक्रम तो शामिल करने ही होंगे|

फिल्म को जीवन्त पर्दे पर उतारना बड़ी चुनौती

राणावत ने कहा कि महाराणा प्रताप तो फादर ऑफ द हिस्ट्री हैं| ऐसे युग पुरुष केव्यक्तित्व और कृतित्व पर ऐतिहासिक फ़िल्म का निर्माण बहुत मेहनत का कार्य है| इस फिल्म में 500 साल पहले के ऐतिहासिक स्थल, परंपरा, भाषा को जीवन्त कर पर्दे पर उतारना बड़ी चुनौती होगी| हालांकि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन काल में कई युद्ध लड़े, लेकिन इनमें तीन प्रमुख युद्ध हैं हल्दीघाटी, चित्तौड़ और दिवेर का युद्ध| इन तीनों युद्ध का फिल्मांकन टेढ़ी खीर होगी|

टाइटल सांग की रिकार्डिंग पूर्ण

विक्की राणावत ने बताया कि फिल्म के टाइटल सांग की रिकार्डिंग पिछले दिनों यशराज स्टुडियो में पूर्ण हो चुकी है| प्रसिद्ध पार्श्व गायक दलेर मेहंदी की मुख्य आवाज़ में 50 कोरस के साथ इस गीत की रिकॉर्डिंग हुई है| इसमें कई संगीतकारों ने हिस्सा लिया| इसमें फिल्म इंडस्ट्री के 150 म्यूजिशियन (संगीतकार) शामिल हुए| फ़िल्म निर्माण में ऐतिहासिक तथ्यों का पूरा ध्यान रखा जाएगा क्योंकि सिर्फ राजपूत या मेवाड़ की ही नहीं विश्व के सर्व समाज की भावनाएं उनसे जुड़ी हुई हैं| फ़िल्म की तैयारियां जोरों पर हैं| उन्होंने बताया कि फ़िल्म को 70 एमएम पर्दे पर ही रिलीज़ किया जाएगा| अगस्त, 2022 तक फिल्म की शूटिंग शुरू करने की योजना है|

टाइटल सांग (शीर्षक गीत) की रिकार्डिंग के बाद प्री-प्रॉडक्शन का कार्य जोरों पर है| कलाकारों का चयन चल रहा है| फिल्म में ख्यातनाम तकनीशियनों का चयन किया गया है| प्रयास यही रहेगा कि वर्ष 2023 में फिल्म प्रदर्शित कर दी जाए| मेवाड़ और आसपास के क्षेत्र के साथ ही जयपुर में भी शूटिंग की जाएगी| साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी मौका दिया जाएगा| विक्की राणावत ने कहा- मैं स्वयं राजपूत हूं और महाराणा प्रताप का वंशधर हूं इसलिए मुझे ध्यान है कि वेशभूषा, रहन-सहन, चाल-ढाल कैसी होनी चाहिए|

फ़िल्म के सलाहकार झाला मान के वंशज प्रतापसिंह तलावदा ने बताया कि अध्यात्म जगत में मीरा बाई तो शौर्य, पराक्रम, स्वाभिमान और वीरता के विषय में महाराणा प्रताप का नाम आज विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है| मेवाड़ के इतिहास का विश्व में सर्वोच्च स्थान है| महाराणा प्रताप सिंह मेवाड़ के वंशज मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य श्री महेंद्रसिंहजी मेवाड़ से भी इस फिल्म को लेकर बात हो चुकी है| जो यथार्थ है वैसा ही फ़िल्म में प्रदर्शित किया जाएगा| चरित्र जैसा है वैसा ही रहेगा|

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