जयपुर। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि एक ओर जहाँ कोरोना महामारी लोगों की साँसे छीन रही है, वहीं दूसरी ओर एम्बुलेंसकर्मी रोगियों से मोटा किराया वसूल रहें हैं, लेकिन अफसोस है कि सरकार इस गलत वसूली पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस किराया नीति से ज़्यादा किराया वसूल करने वाले एम्बुलेंस मालिकों के खिलाफ राज्य सरकार सख़्ती से कार्यवाही कर उनके वाहन ज़ब्त करें।
मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिए सुझाव
राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी को पत्र लिखकर राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया है कि जिस तरह से ऑटो रिक्शा में मीटर लगे होते है, उसी तरह एम्बुलेंस में भी मीटर अनिवार्य कर दिये जाने चाहिये, जिससे कि एम्बुलेंसकर्मी रोगियों के परिजनों से मनमाना पैसा वसूल न कर सके।
मरीजों की विवशता का उठा रहे फायदा
उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे बड़ी दुर्भाग्य की क्या बात होगी कि राज्य सरकार ने एम्बुलेंस किराए की नीति लागू कर रखी है। सरकारी दरों के अनुसार पहले 10 किमी के लिए 500 रुपये ( आना-जाना सम्मलित) तथा 10 किमी के पश्चात् गाडियों के अनुकूल तीन श्रेणियों के अनुसार 12.50 रुपये, 14.50 रुपये और 17.50 रुपये प्रति किमी की दरें निर्धारित है। किन्तु एम्बुलेंस सर्विस प्रोवाइड कराने वाली कंपनियों ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों को डिस्पले/सूचीबद्ध नहीं कर रखा है तथा सरकारी दरों को धता बताकर कोरोना की आपदा को अवसर में तब्दील कर मरीजों की विवशता का फायदा उठाते हुए परिजनों से मोटी रकम वसूलना प्रारंभ कर दिया है।
CM @ashokgehlot51 जी को पत्र लिखकर कोरोना संकट से जूझते प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मोटा किराया वसूलने वाले एम्बुलेंसकर्मियों की मनमानी पर अंकुश लगाने व निजी रोगी वाहनों के किराये के लिए ऑटोरिक्शा की तर्ज पर किराया मीटर लगाने की मांग की।#Rajasthan pic.twitter.com/G21pSLvTgp
— Rajendra Rathore (@Rajendra4BJP) May 7, 2021
होनी चाहिए सख्त कारवाई
राठौड़ ने कहा है कि प्रदेश में जितनी भी एम्बुलेंस चल रही है उनमें से अधिकतर लोन पर है जिन्हें व्यवसाय के साथ-साथ मानवीय सेवा को ध्यान में रख कर ही वित्तीय संस्थानों ने ऋण दिया है। इसके बावजूद कोरोना के अवसाद को अवसर मान कर ये लोग अपने परिजनो को ज़िंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को लूटने में लगें हैं। उन्होंने कहा कि ना केवल ऐसी एम्बुलेंसो के लाइसेंस रद्द किये जाने चाहिये, बल्कि उनके मालिकों के खिलाफ मुकदमें भी दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिये।
