जयपुर : राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार व फेरबदल फिलहाल अनिश्चिता के भंवरजाल में फंस गया है। कम से कम 15 अगस्त तक तो कुछ भी नहीं होगा, क्योंकि राज्यपाल कलराज मिश्र परिवार के साथ आज ही चार दिन की यात्रा पर दिल्ली गए हैं। 15 अगस्त की तैयारियां भी अंतिम चरण में है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वर्तमान मंत्री ही इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण करेंगे। आज के दिन का एक संयोग यह भी है कि आज के दिन सचिन पायलट और कांग्रेस आलाकमान के बीच संधि हुई थी। यानी सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद सुलह हुए आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन पायलट कैंप अब भी मुद्दों के समाधान का इंतजार कर रहा है।
बढ़ रही है फिर से नाराजगी
पायलट कैंप से सुलह के लिए तीन नेताओं की कमेटी बनाई गई थी। कमेटी बनने के साल भर बाद भी न रिपोर्ट का पता है और न एक्शन का। लंबा समय बीत जाने के बाद भी मांगों के पूरा नहीं होने पर अब नाराजगी बढ़ रही है। पायलट समर्थक विधायक और नेता पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में भी तत्काल एक्शन चाहते हैं। उसे देखते हुए खींचतान बढ़ने के आसार हैं।
अविलम्ब समाधान चाहते हैं पायलट समर्थक
पायलट कैंप के विधायक और समर्थक उनकी सरकार में नहीं सुने जाने और उपेक्षा का आरोप लगा चुके हैं। सचिन पायलट खुद चुप हैं, लेकिन उनके समर्थक अंदरखाने नाराज हैं। पायलट समर्थकों ने एक बार फिर सुलह के वक्त तय हुए मुद्दों का तुरंत समाधान करने की मांग उठाई है। पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन से सचिन पायलट ने मुलाकात की थी। विधानसभा में 28-29 जुलाई को फीडबैक में पायलट समर्थक विधायकों ने भी अपनी बात रखी थी।

सुलह में ये है झगड़ा
सचिन पायलट कैंप मंत्रिमंडल में 6 से ज्यादा समर्थक विधायकों की एंट्री चाहता है। राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन में भी बराबर की हिस्सेदारी की मांग है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शेयरिंग पैटर्न पर सहमत नहीं हैं। इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार अटका हुआ है।
10 अगस्त 2020 को बनी थी सुलह कमेटी
पिछले साल 10 अगस्त को रात 8 बजे कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लिखित बयान जारी किया था। जिसमें सचिन पायलट से सुलह होने, उनके और समर्थकों की मांगों पर विचार करने के लिए तीन नेताओं की कमेटी बनाने की घोषणा की गई थी। सुलह कमेटी में उस समय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रभारी अजय माकन और अहमद पटेल को शामिल किया गया। अहमद पटेल का निधन हो चुका है। इस कमेटी के सामने पायलट समर्थक अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन अब मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
बाड़ेबंदी में रहे थे गहलोत-पायलट खेमों के विधायक
सचिन पायलट ने 18 विधायकों के साथ पिछले साल 11 जुलाई को बगावत की थी। बगावत के बाद 34 दिन तक सरकार के मंत्री और समर्थक विधायक जयपुर और जैसलमेर के होटलों में बाड़ेबंदी में रहे थे। 10 अगस्त 2020 को पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ प्रियंका गांधी से मिले थे। इससे पहले राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई थी। सुलह में प्रियंका गांधी की बड़ी भूमिका रही थी।
मांगें जल्द पूरा करना पार्टी हित में-भाकर
पायलट समर्थक विधायक मुकेश भाकर ने कहा कि सचिन पायलट साल भर से विधायक के तौर पर काम कर रहे हैं। पार्टी को उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहिए। साल भर पहले हमारी मांगों के समाधान के लिए बनी कमेटी की रिपोर्ट आनी चाहिए। उसके हिसाब से मांगों का समाधान करना चाहिए। हम सब कांग्रेस की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। फैसले लेने में देरी से पार्टी का ही नुकसान होता है। हम चाहते हैं कि पार्टी फिर से राजस्थान की सत्ता में आए।
वक्त पर फैसले लेने जरूरी-गुर्जर
पायलट समर्थक कांग्रेस विधायक इंद्राज गुर्जर ने कहा कि साल भर पहले कमेटी बनी थी, उसके सामने रखी हुई मांगों को अब अविलंब पूरा करने का वक्त आ गया है। राजनीति में वक्त पर फैसले बहुत जरूरी है, हमारा हाईकमान से भी यही आग्रह है।
