गांधीनगर: विजय रूपाणी के गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शनिवार को इस्तीफा देने के बाद कयासों का बाजार गर्म था कि बीजेपी किसके हाथों में राज्य की कमान सौंपेगी,लेकिन रविवार को काफी गहमागहमी के बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक में विधायक भूपेंद्र रजनीकांत पटेल को गुजरात का नया मुख्यमंत्री चुना गया। CM के तौर पर उनका नाम सबके लिए चौंकाने वाला था। इसकी वजह यह है कि पटेल हमेशा लो प्रोफाइल रहते हैं। लेकिन पाटीदार समाज में अच्छी पैठ ने उन्हें इस रेस में सबसे आगे निकाल दिया। वहीं, RSS से लंबे वक्त का जुड़ाव और पार्टी कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क भी उनके पक्ष में गया। वे मोदी-शाह की गुड बुक में भी शामिल माने जाते हैं।
गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री केवल 12वीं पास,सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भूपेंद्र पटेल पाटीदार समाज के नेता हैं। वे राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन के करीबी हैं। आनंदीबेन पटेल ने 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। इसके बाद उनके कहने पर ही घाटलोडिया सीट से पटेल को टिकट दिया गया था। भूपेंद्र पटेल को उनके निर्वाचन क्षेत्र में कार्यकर्ता ‘दादा’ उपनाम से ही पुकारते हैं।
राजनीति में पूरी तरह एंट्री से पहले अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (एयूडीए) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इतना ही नहीं जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे, तब 1999-2001 के बीच पटेल अहमदाबाद नगरपालिका की स्टैंडिंग कमेट के अध्यक्ष रहे, जबकि 2008-10 के बीच वे अहमदाबाद नगरपालिका स्कूल बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे। 2010 से 2015 के दौरान वे अहमदाबाद के ही थालतेज वार्ड से पार्षद भी रह चुके हैं।
पहली बार विधायक बने और पार्टी ने CM बना दिया
भूपेंद्र पटेल कडवा पाटीदार समाज के नेता हैं। वे राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन के करीबी माने जाते हैं। पटेल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अहमदाबाद जिले की घाटलोडिया सीट से रिकॉर्ड 1.17 लाख वोट से जीत दर्ज की थी। उन्हें 1.75 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के शशिकांत पटेल को 57,902 वोट ही मिले थे।
