स्वच्छता एवं पर्यटन में डूंगरपुर निकाय को देश में अव्वल बनाने का श्रेय के.के. गुप्ता और नगरवासियों को है : धनखड़

@ नीति गोपेंद्र भट्ट

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डूंगरपुर

नई दिल्ली। पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने स्वच्छता एवं पर्यटन में डूंगरपुर निकाय को देश में अव्वल बना नई इबारत लिखने का श्रेय पूर्व सभापति के के गुप्ता और नगरवासियों को दिया है। राजस्थान के पूर्व स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और डूंगरपुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष के.के.गुप्ता ने हाल ही सीकर में पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ से शिष्टाचार भेंट की। के.के.गुप्ता ने उन्हें गौ माता का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। गुप्ता के साथ उनकी धर्मपत्नी सुशीला गुप्ता भी थी। राज्यपाल धनखड़ का हरफूल सिंह चौधरी के पुत्री की शादी समारोह में गुड़ा के पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, हरीश पटेल और मदन शर्मा आदि की उपस्थिति में सम्मान किया गया। इस मौके पर डूंगरपुर की स्वच्छता की चर्चा करते हुए धनकड़ ने डूंगरपुर निकाय की प्रशंसा की।

धनखड़ ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान के छोटे से डूंगरपुर शहर में हुए कार्यों से नगर का नाम न केवल देश में रोशन हुआ वरन इसने राजस्थान के नाम को भी विश्व मानचित्र पर रोशन किया है। राज्यपाल धनकड ने के. के. गुप्ता के निमन्त्रण पर जल्द डूंगरपुर आकर वहाँ हुए कामों को करीब से देखने की मंशा जताई। गवर्नर ने कहा कि के.के.गुप्ता जैसे विकास के नायक सभी निकायों को मिलने चाहिए। उन्होंने गौ सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्य में अग्रवाल समाज सबसे आगे हैं।

कठिन समय ने हमें पर्यावरण का महत्व समझाया – के.के.गुप्ता

इस मौके पर के.के.गुप्ता ने बताया कि स्वच्छता यह साधारण शब्द जरूर है परंतु इसकी उपयोगिता बहुत बड़ी है। हमें अपने घरों के साथ साथ अपने मोहल्ले, अपना गांव व अपने शहर को भी स्वच्छ बनाना हैं। जिसमें मुख्य रुप से प्रतिदिन घर का गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके कचरे की गाड़ी में डालना और खुले में किसी भी प्रकार का कचरा नहीं डालने की सौगंध भी लेनी होगी। साथ ही प्लास्टिक को पूरी तरह से प्रतिबंध करना होगा यह छोटा सा कदम देश के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

कोरोना महामारी के कठिन समय ने हमें पर्यावरण का महत्व समझाया हैं। वातावरण में ऑक्सीजन की कमी सबके लिए घातक है। प्रकृति का संतुलन बनाने में पेड़ों के महत्व को देखते हुए हर घर के आगे कम से कम चार पेड़ लगाने का लक्ष्य पूरा करना होगा तथा गांव एवं शहर में सघन वृक्षारोपण कर हमें वातावरण में फैली जहरीली गैसों को खत्म करने के प्रयास भी करने होंगे। जल संरक्षण एवं जल संचय पर उन्होंने कहा कि सभी को छोटे-छोटे तरीकों से पानी को बचाना होगा। तभी हम धरती में घट रहे जलस्तर को बढ़ा पाएंगे तथा आने वाले समय को सुखद बना पाएंगे। जल है तो कल है यह यथार्थ है ।

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