भारत में कम्प्यूटर और सूचना क्रांति के जनक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के व्यक्तित्व को लेकर यूं तो बहुत सी बातें की जाती हैं, लेकिन उनमें से कुछ बातें ऐसी हैं जो उनकी छवि को उजली, साफ, सरल और सबसे अलग होने का अहसास करवाती हैं। राजीव गांधी के इस सौम्य स्वभाव के कारण कार्यकर्ता अपने आपको उनके निकट समझते थे। वे कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रखते थे। यही कारण था कि उनके समय में नेता क्या, कार्यकर्ता सभी संगठन के प्रति उत्साह से लबरेज रहते थे। राजीव गांधी से जुड़े कई ऐसे संस्मरण हैं, जो उनकी महानता को प्रदर्शित करते हैं।
पहुंच गए कार्यकर्ताओं के बीच
बात 1985 की है। राजीव गांधी राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पूर्व डिफेन्स के एक कार्यक्रम में भाग लेने जयपुर आए थे। उन दिनों प्रदेश कांग्रेस का मुख्यालय बनीपार्क स्थित वर्तमान अग्रिम संगठनों वाला कार्यालय हुआ करता था। जैसे ही राजीव गांधी के प्रदेश कांंग्रेस कार्यालय के आगे से जाने की जानकारी वहां मौजूद तत्कालीन एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष अश्क अली टाक व उनके साथियों को मिली। वे उत्सुकतावश कार्यालय के बाहर आकर खड़े हो गए। जैसे ही काफिला उधर से गुजरने लगा तो कार्यकर्ताओ ने “राजीव गांधी जिंदाबाद नारेबाजी” शुरू कर दी।

राजीव गांधी का ध्यान कार्यकर्ताओं व प्रदेश कांग्रेस के लगे बोर्ड पर गया तो उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवा ली और कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच गए। पूर्व मंत्री अश्क अली टाक के साथ उस समय खादी बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनिल पारीक, राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य श्रवण तंवर, कमल कंदोई, पवन कंदोई, सजन सिंह थे।
पन्द्रह मिनट रुके
प्रधानमंत्री राजीव गांधी का बीच रास्ते में काफिला रुकवाकर पीसीसी में चले आना अकल्पनीय था। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में उस समय कोई बड़ा नेता भी मौजद नहीं था तो राजीव गांधी से बात करने के लिए कांग्रेस कार्यालय के सचिव पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा को बुला लाए। पंडितजी ने उनसे बात की। उन्हें पूरा दफ्तर दिखाया। करीब पंद्रह मिनिट तक राजीव गांधी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच रहे और बाते की।
रजिस्टर पर दिया अपना ऑटोग्राफ
पीसीसी की अचानक विजिट के प्रत्यक्ष गवाह श्रवण तंवर ने बताया कि राजीव गांधी की इस विजिट को चिर स्थाई बनाए रखने के लिए हमने एनएसयूआई के रजिस्टर पर राजीव जी के ऑटोग्राफ के रूप में हस्ताक्षर भी करवाए थे। उन्हें एनएसयूआई का न्यूज़ लेटर भी दिखाया जो उन दिनों समय-समय पर प्रकाशित किया जाता था।

मेरे जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
पूर्व मंत्री अश्क अली टाक तो इस घटना को अपने राजनीतिक जीवन का सबसे ट्रनिंग पॉइंट मानते हैं। वे संस्मरण बताते भावुक हो रुक से गए।
चपरासी के कहने पर बदला टिकट
इस दौरान राजीव गांधी ने कांग्रेस कार्यालय में चपरासी बोदूराम से भी बात की। राजीव जी ने जब पूछा,क्या काम करते हो तो बोदूराम ने बताया वे यहां चपरासी हैं। बोदूराम ने बातों ही बातों में राजीव गांधी को बनीपार्क विधानसभा क्षेत्र के बारे में बताया और कहा कि बनीपार्क से कांग्रेस ने गलत टिकट दे दिया। अगर कांग्रेस शिवराम शर्मा को टिकट देती है तो वे चुनाव जीत सकते हैं। विधायक स्व.शिवराम शर्मा को कटा हुआ टिकट राजीव गांधी के इस दौरे के बाद ही मिला था।
उपाध्याय को भी मिला अभयदान
उस समय एक और वाकया हुआ। राजीव गांधी ने पूर्व मंत्री व सांसद रामपाल उपाध्याय को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में देखा तो पूछा आप यहां क्या कर रहे हो। अपने क्षेत्र में क्यों नहीं गए? उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश के नेताओं ने उन्हें बीमार बता कर टिकट कटवा दिया, जबकि वे पूर्णरूप से स्वस्थ्य हैं। राजीव गांधी के हस्तक्षेप के बाद रामपाल उपाध्याय को भी टिकट मिला। उपाध्याय को टिकट मिलना किसी अभयदान से कम नहीं था।
राजीव गांधी आग्रह स्वीकार कर फतेहपुर भी आए
चूंकि पूर्व मंत्री अश्क अली टाक को फतेहपुर से टिकट मिल चुका था। टाक ने जब उनसे फतेहपुर आने का अनुरोध किया तो उन्होंने अपने साथ काफिले में मौजूद अरुण सिंह को नोट करवाया फिर वे कुछ दिनों बाद फतेहपुर में अश्क अली के समर्थन में सभा संबोधित करने आए भी।
बच्चों के बीच खूब लगाए ठहाके
सहज और सरल स्वभाव राजीव गांधी का बच्चों, छात्र-छात्राओं, नौजवानों से विशेष लगाव था और जब वे उनके बीच जाते थे तो वे अपने आपको भूला वैसे ही बन जाते थे। बात 1986 की है। बांसवाड़ा दौरे के दौरान राजीव गांधी एनएसयूआई कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे और वहां स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ खूब ठहाके लगाए। राज्य उपभोक्ता मंच के सदस्य तथा उस समय के बांसवाड़ा के एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र भट्ट ने बताया कि राजीवजी का यह बांसवाड़ा दौरा उनके स्मृति पटल पर आज भी जीवंत है। भट्ट ने अपने खून से लिखा एक शपथ पत्र भी राजीव गांधी को सौंपा था।

मिस्टर क्लीन
बोफोर्स मामले को लेकर प्रतिपक्ष के आरोपों की बौछार से भले ही उन दिनों कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेता घबराए हुए थे पर मिस्टर क्लीन के नाम से मशहूर राजीव गांधी अपनी इस बात पर अडिग थे कि वे पाक साफ है। देश के विभिन्न राज्यों से दिल्ली बुलाए गए एनएसयूआई के चुनिंदा कार्यकर्ताओं के समक्ष भी राजीव गांधी ने अपनी इसी बात को दोहराया। इन कार्यकर्ताओ में से एक दो ने सवाल किए और कहा कि बोफोर्स मामले को लेकर कांग्रेस को चोर कहा जाता है । इसका वे क्या जवाब दे तो राजीव गांधी ने कहा, आपको अपने नेता पर भरोसा होना चाहिए। वे बेदाग है। जांच हो जाने दो, जांच में भी आपका नेता पाक साफ निकलेगा। एनएसयूआई की इस बैठक में राजस्थान से वर्तमान पीसीसी सदस्य शंकर डंगायच गए थे।

उनका आकर्षण ही कुछ अलग था
लंबे समय तक एनएसयूआई व युवा कांग्रेस से जुड़े अरुण कुमावत के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी का आकर्षण ही कुछ ऐसा था कि कार्यकर्ताओं में निकट से एक झलक देखने की लालसा रहती थी। राजीवजी 1987 में जयपुर विद्या आश्रम स्कूल में सेवादल के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में पधारे तो जयपुर एयरपोर्ट पर स्वागत और अगवानी का मुझे भी मौका मिला। इसी तरह 1990 में राजीव गांधी जयपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में आए तो उनके साथ स्टेज पर जयपुर जिला एनएसयूआई अध्यक्ष होने के नाते सम्मिलित होने सुअवसर मुझे मिला। उनमें सादगी इस कदर थी कि जब सम्मेलन में लंच ब्रेक हुआ तो वो इस कदर सभी मे घुल मिल गए कि उन्होंने अपने सुरक्षा अधिकारियों को कहा कि आप लोग खाना लीजिए यहां मुझे कोई खतरा नही।

पत्रकार व राजीव गांधी
राजीव गांधी का पत्रकारों से भी एट्रेक्शन था। राजीव गांधी रेल यात्रा पर राजस्थान के दौरे के दौरान जब जयपुर आए तो श्रमजीवी पत्रकार संघ की ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में भी भाग लिया। राजीव गांधी ने इस मीट द प्रेस में एक साधारण सी दरी पर बैठ राजनीति से इतर भी खूब बाते की। वहां से बाहर निकल पत्रकार साथी का नाम पुकारा और उससे गवर्मेंट हॉस्टल के लॉन में करीब बीस मिनट गुफ़्तगू की। राजीव गांधी को दोनों कंधों पर हाथ रख आत्मीयता के साथ पत्रकार से बातचीत करते देख वहां मौजूद कांग्रेस नेता भी चौंक गए। पत्रकार रामवतार शर्मा और राजीव गांधी के बीच क्या बात हुई। इसका तो किसी को पता नहीं,पर हां! राजीव गांधी के वहां से जाने के बाद कई नेता पत्रकार साथी से बातचीत का ब्यौरा पूछते नजर आए।
चौमूं में चाव से खाए भुट्टे
राजीव गांधी ने जयपुर से सीकर रेल यात्रा के दौरान चौमूं में भुट्टे बड़े चाव से खाए। वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कहने पर एक कार्यकर्ता यात्रा में चल रहे नेताओं के लिए भुट्टे सिकवा कर लाया था। उसमें से एक भुट्टा राजीव गांधी ने भी खाया।
