जयपुर। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चैत्र नवरात्र की शुरुआत 13 अप्रैल से हो रही है। नवरात्र का आरंभ अश्विनी नक्षत्र में होगा, जिसके स्वामी ग्रह केतु व देवता अश्विनी कुमार हैं, जो आरोग्य के देवता माने जाते हैं। माना जा रहा है मां दुर्गा कोरोना महामारी से राहत दिलाएंगी। इस बीच गुरु भी मकर राशि से कुंभ राशि में आ चुके होंगे। गुरु का यह परिवर्तन भी राहत देगा। ज्योतिषियों ने ब्रह्म मुहूर्त में घट स्थापना को सर्वश्रेष्ठ बताया है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया नवरात्र का आगमन इस बार कई शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग में चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा। 13 अप्रैल से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है। नवरात्र का घट स्थापना होगी। चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे और देर रात सूर्य भी मेष में आएंगे। ऐसे में यह अद्भुत संयोग है कि राशि चक्र की पहली राशि में चैत्र नवरात्र यानी संवत के पहले दिन ग्रहों के राजा और रानी स्थित होंगे।
घट स्थापना का मुहूर्त
सूर्योदय 6:09 पर होगा, द्विस्वभाव लग्न(मीन) 6:12 तक रहेगा। इस कालखंड में घट स्थापन सर्वश्रेष्ठ।
9:46 से मध्यान्ह 12:00 तक मिथुन लग्न तथा अभिजीत मुहूर्त। 12:02 से 12:52 तक घट स्थापना का मुहूर्त शुभ है।
नवरात्र की तिथियां
- 13 अप्रैल प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा
- 14 अप्रैल द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 15 अप्रैल- तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
- 16 अप्रैल- चतुर्थी- मांकुष्मांडा पूजा
- 17 अप्रैल- पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
- 18 अप्रैल- षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
- 19 अप्रैल- सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
- 20 अप्रैल- अष्टमी- मां महागौरी पूजा
- 21 अप्रैल- नवमी- मां सिद्धिदात्री की पूजा और भगवान राम का जन्मोत्सव
- 22 अप्रैल- दशमी- नवरात्रि का पारण किया जा सकेगा।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार चैत्र नवरात्र का आरंभ इस बार भी ऐसे वक्त में होने जा रहा है जब कोरोना एक बार फिर से अपना फन फैला रहा है और एक बार फिर से यह पूरी दुनिया में दहशत में है। इस बार भी चैत्र नवरात्र के वक्त कोरोना का संकट एक बार फिर से गहरा गया है। ऐसे में लगता है कि अब मां दुर्गा का चमत्कार ही इस महामारी का खात्मा कर सकता है। इस बार नवरात्र का आरंभ दो विशेष शुभ योग के बीच होने जा रहा है।
