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पीडि़त मानवता की सेवा ही सच्चा युगधर्म विषयक वेबिनार शनिवार को

जयपुर। डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन (दिया),राजस्थान की ओर से 29 मई शनिवार को शाम 5 से 6 बजे तक वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। कोविड-19 के परिपेक्ष्य में पीडि़त मानवता की सेवा ही सच्चा युगधर्म विषयक वेबिनार में शांतिकुंज हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी वेबिनार के मुख्य वक्ता होंगे। जूम एप और दिया राजस्थान के फेसबुक के माध्यम से इस वेबिनार से जुड़ा जा सकता है।

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डॉ चिन्मय पंड्या एक ऐसे युवा है

गायत्री परिवार के राजस्थान प्रभारी जयसिंह यादव ने बताया कि डॉ चिन्मय पंड्या एक ऐसे युवा है जो ब्रिटेन जैसे शाही देश में डॉक्टर की सर्विस त्यागकर अपनी मातृभूमि की सेवा के भाव से पुन: देश लौटे है। 2010 से लगातार देव संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रतिकुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। साथ-साथ राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर की कई नामी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे है।

वर्तमान में डॉ पंड्या अध्यात्म के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नोबेल पुरस्कार के समकक्ष टेम्पल्टन पुरस्कार की ज्यूरी के मेंबर भी है, जो कि समूचे भारतवर्ष के लिए गर्व और गौरव की बात है क्योंकि पहले भारतीय है जो इस पुरस्कार की चयन समिति के सदस्य है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या इनके पिता हैं। करोड़ों गायत्री परिजनों के आस्था के केंद्र युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी शर्मा की गोदी में खेलने का सौभाग्य बचपन में इन्हें प्राप्त हुआ।

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करिश्माई व्यक्तित्व के धनी डॉ. पंड्या भारतीय संस्कृति को वर्तमान की तमाम समस्याओं के समाधान के रूप में देखते है। इनके ओजस्वी भाषण सुनने को हर कोई लालायित रहता है। यह अपने धाराप्रवाह उद्बोधन से श्रोताओं को भीतर से झकझोर कर सकारात्मक दिशा में सोचने को मजबूर कर देते है। भारतीय वेशभूषा धोती-कुर्ते और खड़ाऊ धारण किए डॉ पंड्या बेहद विनम्र स्वभाव के धनी है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय को परिवार की भांति संचालित करके डॉ पंड्या प्रतिकुलपति के साथ अभिभावक की भूमिका का निर्वहन कर रहे है। इसी का नतीजा है कि विद्यार्थी प्यार से इन्हें भैया भी कहते है। यहां अध्ययनरत हो या पुराना कोई भी विद्यार्थी सहजतापूर्वक इनसे मिल सकता है। नित्य नए प्रयोग करने का स्वभाव इनके व्यक्तित्व में चार चांद लगाता है। बेहद कम समय में डॉ पंड्या ने काफी ऊंचे मुकाम हासिल किए है।

यूएनओ की परिषद में हैं सदस्य

संयुक्त राष्ट्र संगठन यूएनओ द्वारा विश्व शांति के लिए गठित अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक आध्यात्मिक मंच के निदेशक के साथ ही इंडियन काउंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशन के परिषद् सदस्य जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। बीते साल ब्रिटेन रॉयल मेथोडिस्ट हॉल में फेथ इन लीडरशिप संस्थान द्वारा विभिन्न धर्मों के आपसी सद्भाव विषय पर डॉ पंड्या ने अपने विचार रखे, जिसमें प्रिंस चाल्र्स, कैंटरबरी के आर्कबिशप, यहूदियों के मुख्य आचार्य, ब्रिटेन के गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे। डॉ. पंड्या के विचार से प्रभावित होकर उन्हें दूसरे दिन हाउस ऑफ लॉर्डस में अपने विचार व्यक्त करने को आमंत्रित किया गया।

कर चुके हैं भारत का प्रतिनिधित्व

डॉ पंड्या ने इथोपिया में आयोजित यूनेस्को के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। नतीजन योग को वैश्विक धरोहर का दर्जा मिला। वियना में हुए संयुक्त राष्ट्र धर्म सम्मेलन में डॉ. पंड्या ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके वक्तव्य से प्रभावित होकर पाकिस्तानी धर्म गुरुओं ने उन्हें पाकिस्तान आने का न्यौता दिया।

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