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रिचर्ड ब्रैन्सन और भारतवंशी सिरिशा बांदला के स्पेस ट्रिप ने रच दिया इतिहास

रिचर्ड ब्रैन्सन और भारतवंशी सिरिशा के स्पेस ट्रिप ने रच दिया इतिहास

वाशिंगटन: ब्रिटिश अरबपति और वर्जिन ग्रुप के फाउंडर रिचर्ड ब्रैन्सन और भारतवंशी सिरिशा बांदला ने रविवार को इतिहास रच दिया। वे वर्जिन गैलेक्टिक रॉकेट प्लेन से 60 मिनट की अंतरिक्ष यात्रा करके लौटे। लैंडिंग के साथ ही उन्होंने अपने इस अनुभव को यादगार बताया। वर्जिन गैलेक्टिक के पैसेंजर रॉकेट प्लेन VSS यूनिटी में सवार होकर ब्रैन्सन अंतरिक्ष के किनारे तक गए और वहां भारहीनता का अनुभव भी किया।

वर्जिन के इस प्लेन ने रात करीब 8.10 बजे (भारतीय समय के मुताबिक) न्यू मैक्सिको से उड़ान भरी थी। उड़ान से पहले ब्रैन्सन ने कहा कि मेरा मिशन स्टेटमेंट है, मेरे नाती-पोतों, आपके नाती-पोतों और सबके लिए अंतरिक्ष यात्रा का सपना सच करना। उनके इस सफर को देखने के लिए टेस्ला के CEO एलन मस्क भी पहुंचे हैं। उनकी कंपनी स्पेसएक्स भी स्पेस टूरिज्म की बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिशों में जुटी है।

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ब्रैन्सन ने कहा कि अगले साल कॉमर्शियल टूर शुरू करने से पहले वे खुद इसका अनुभव लेना चाहते हैं। अगर यह उड़ान कामयाब रहती है तो उनकी कंपनी वर्जिन अंतरिक्ष के लिए कॉमर्शियल टूर शुरू करने की ओर सबसे बड़ा पड़ाव पार कर लेगी।

रॉकेट में भारत की सिरिशा बांदला समेत कुल 6 लोग

रिचर्ड बतौर मिशन स्पेशलिस्ट स्पेसशिप-2 यूनिटी से जुड़े हैं। उनके साथ भारतवंशी सिरिशा बांदला समेत 5 और लोगों ने उड़ान भरी। सिरिशा इस मिशन के बाद अंतरिक्ष में जाने वाली कल्पना चावला के बाद भारत में जन्मीं दूसरी महिला बन गई हैं। 34 साल की सिरिशा एयरोनॉटिकल इंजीनियर हैं।

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2022 से कॉमर्शियल टूर शुरू होंगे

रिचर्ड ब्रैन्सन की अपनी कंपनी है वर्जिन गैलेक्टिक। इसने अब तक तीन बार एज ऑफ स्पेस तक की यात्रा की है। पर यह अब तक टेस्ट फ्लाइट्स ही थी। 25 जून को कंपनी को औपचारिक तौर पर लाइसेंस मिला है। यानी अब कंपनी आम लोगों को बेसिक ट्रेनिंग के बाद स्पेस तक ले जा सकती है। ब्रैन्सन की उड़ान को इसका ट्रायल कहा जा सकता है। ब्रैन्सन और बेजोस की कंपनियों को क्रू के साथ मिशन की अनुमति मिल चुकी है।

इसी वजह से ब्रैन्सन 11 जुलाई और बेजोस 20 जुलाई को अपनी कंपनियों के पहले मैन्ड-मिशन में साथ जाकर इतिहास रचने जा रहे हैं। ब्रैन्सन की कंपनी की तैयारी 2022 से हर हफ्ते लोगों को स्पेस तक ले जाने की है। इसके लिए वह 2.50 लाख डॉलर यानी करीब 1.90 करोड़ रुपए वसूलने की तैयारी में है। इसी आधार पर रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक स्पेस टूरिज्म मार्केट 3 बिलियन डॉलर, यानी करीब 26 हजार करोड़ रुपए का होने जा रहा है।sirisha bandla .jpeg 0

25 जून को मिला लाइसेंस

ब्रैन्सन खुद फ्लाइट में इसलिए गए, ताकि यह पता चल सके कि कितना वक्त लगेगा, टूरिस्ट का वेटलेसनेस का अनुभव कैसा रहेगा, इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। इस वजह से उन्हें मिशन स्पेशलिस्ट यानी चालक दल का सदस्य कहा जा रहा है।

मजेदार बात यह है कि ब्रैन्सन का कोई प्लान था ही नहीं। हर तरफ बेजोस के स्पेस ट्रैवल की ही चर्चा थी। पर जब वर्जिन गैलेक्टिक को 25 जून को लाइसेंस मिल गया तो कंपनी ने 11 जुलाई के अपने मिशन की घोषणा कर दी। साफ है कि ब्रैन्सन स्पेस टूरिज्म की इस होड़ में बेजोस को पछाड़ना चाहते हैं।

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