नागौर: राजस्थान नागौर के सिंगर सवाई भाट किसी परिचय के मोहताज नहीं है। आज वे जिस मुकाम पर है वहां तक पहुंचने में लोगों को सालों लग जाते है, लेकिन युवा सवाई ने ये कारनामा इतनी कम उम्र में कर दिखाया है। अपने सपनो को पूरा करने के लिए राजस्थान से मुंबई तक का ये सफर आसान नहीं था। इंडियन आइडल-12′ के टॉप 8 में जगह बना उन्होंने अपने घर वालो का ही नहीं बल्कि राजस्थान का मान भी बढ़ाया। इसी सफर के साथ इंडियन आइडल-12′ के सवाई भाट को सिंगिंग का पहला ब्रेक मिलने के बाद अब उनके गाने की रिलीज डेट आ गई है। नागौर निवासी सवाई के फैंस को उनके गाने का ज्यादा इन्तजार भी नहीं करना पड़ेगा। सवाई हिमेश रेशमिया के नए एलबम ‘हिमेश दिल से’ के पहले गाने से इसकी शुरुआत करेंगे। कल शनिवार दोपहर एक बजे सवाई के सॉन्ग ‘सांसें” को रिलीज किया जा रहा है।
दरअसल, सवाई भाट के शो से बाहर होने के बाद उनके कई फैन को निराश हो गए थे। वहीं कई बड़े सेलिब्रिटी ने उनके बाहर होने के बाद पोस्ट भी शेयर की। लेकिन हिमेश रेशमिया के एल्बम से उनके कमबैक की खबर सुनने के बाद से ही फैंस में जबरदस्त उत्साह है।

अपनी गायकी से देशभर में लाखों लोगों को अपना दीवाना बना चुके सवाई को मशहूर बॉलीवुड संगीतकार, एक्टर और गायक हिमेश रेशमिया के नए एलबम हिमेश के दिल से एलबम में गाने का मौका मिला। खास बात यह है कि उन्होंने इस एल्बम का पहला सॉन्ग ‘सांसें’ गाया है, जो बेहद रोमांटिक बताया जा रहा है। हिमेश ने सिंगर के साथ गाने को रिलीज करने का ऐलान पहले ही कर दिया था। हिमेश रेशमिया ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाई द्वारा गाये गए अपने नए एल्बम ‘हिमेश दिल से’ के पहले सॉन्ग ‘सांसे’ की जानकारी दर्शको के साथ शेयर की।

हिमेश ने लिखा, ‘हिमेश रेशमिया मेलॉडीज लेबल के तहत बनने वाले मेरे नए एल्बम हिमेश के दिल से का पहला गाना सवाई भाट ने गया है। इसे कल शनिवार 3 जुलाई दोपहर एक बजे रिलीज किया जाएगा। भले ही ये गाना सवाई का डेब्यू गाना हो लेकिन सवाई ने इसे जबरदस्त अंदाज से गाया है। आप सभी सवाई को अपना प्यार और आशीर्वाद दे।
कठपुतली के खेल से बॉलीवुड तक का सफर
अपनी गायकी से देशभर में लाखों लोगों को अपना दीवाना बना चुके सवाई का जीवन संघर्षों भरा रहा है। शो में जाने से पहले तक राजस्थान के नागौर जिले के गच्छीपुरा गांव निवासी 20 साल के सवाई भाट अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए गांव-गांव कठपुतली का खेल दिखा व देश विदेश से आने वाले पर्यटकों का मनोरंजन कर किया करते थे।

बहुत छोटी उम्र में ही सवाई अपने दादा खैराती भाट व पिता रमेश भाट के साथ कठपुतली का खेल दिखाने के दौरान गांव-गांव घूमते थे। उन्हाेंने गांव-गांव घूमकर कठपुतली का खेल दिखा कर अपने पिता रमेश व माता सुशीला का घर चलाने में साथ दिया। उन्होंने बताया की कठपुतली का खेल दिखाने के दौरान ढोलक व हारमोनियम बजाते- बजाते वो शादी-ब्याह की महफिलों और आस-पड़ोस में होने वाले माता के जगरातों व भजन संध्या कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों के साथ कमाई की आस लिए हारमोनियम और तबला बजाने के लिए भी जाने लगे। मांगणियार और लंगा गायकों के साथ गाने-बजाने का काम भी किया।
