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सरिस्का जंगल में विकराल हुई आग : 25 टाइगर खतरे में, आग बुझाने में लगे सेना के 2 हेलिकॉप्टर लगे

सरिस्का

अलवर : सरिस्का जंगल में पिछले 36 घंटे से लगी आग विकराल होकर जंगल के 20 किलोमीटर से ज्यादा एरिया में फैल चुकी है। आग पर काबू नहीं हो पाने की वजह से वन विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। आग जंगल के जिस हिस्से में तेजी से बढ़ रही है वहां कई टाइगर हैं। आग बुझाने के लिए अब हेलिकॉप्टर व एरियल लिफ्ट फायर ब्रिगेड से मदद मांगी गई थी। इसके बाद मंगलवार सुबह पहुंचे सेना के दो हेलिकॉप्टर ने आग बुझाना स्टार्ट कर दिया है। हेलिकॉप्टर सिलीसेढ़ झील से पानी ला रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सरिस्का, अलवर और दौसा की तीन रेंज का स्टाफ और ग्रामीणों सहित 200 से ज्यादा लोग आग बुझाने में लगे हैं। सेना से भी मदद मांगी गई है। सरिस्का के कई गांव भी खाली करवा लिए गए हैं।

पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आ रही परेशानी

नायब तहसीलदार खेमचंद सैनी ने बताया कि कानूनगो से मिली रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार सुबह तक 20 किलोमीटर से ज्यादा एरिया आग की चपेट में आ गया है। रविवार को बालेटा पृथ्वीपुरा नाका स्थित पहाड़ियों में आग लग गई थी। इसके बाद रविवार रात करीब 8 बजे से ही वन कर्मियों और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, अब तक आग पर काबू नहीं पाया गया। सोमवार शाम आग का फैलाव नारंडी, रोटक्याला और बहेड़ी तक हो गया है।

सरिस्का

सरिस्का डीएफओ सुदर्शन शर्मा का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण चढ़ने में परेशानी आ रही है। आग बुझाने में जुटे लोगों के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है। आग से करीब 150 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। आग वाले हिस्से में 500 से 1000 मीटर दूर पर फायर लाइन बनाई गई है।

बाघ एसटी-20, एसटी-17 व एसटी-14 आग से घिरे

अकबरपुर रेंज में जहां आग लगी है, वह बाघों की नर्सरी है। यही सबसे बड़ा खतरा है। यहां के नारेंडी एनीकट पर 26 मार्च को बाघिन एसटी-17 का लगातार मूवमेंट था। पगमार्क मिले और डायरेक्ट साइटिंग भी हुई थी। उसके साथ दो शावक भी हैं। रोटक्याला वन खंड में बाघ एसटी-20 और एसटी-14 घूम रहे हैं। ऐसे में केवल मौजूदा टाइगर व तेंदुए को खतरा है, बल्कि चिंता की बात ये है कि सरिस्का की आबादी बढ़ाने के लिए सबसे मुफीद जंगल आग में तबाह हो रहा है।

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