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राहुल बजाज का दक्षिणी राजस्थान से भी था गहरा सम्बन्ध : माही बजाज सागर बांध परियोजना का नाम दादा जमनालाल बजाज के नाम पर रखा गया है

राहुल बजाज

नई दिल्ली। जाने माने उध्योगपति और पद्म भूषण से सम्मानित राहुल बजाज का हाल ही लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका राजस्थान से गहरा सम्बन्ध था। सब जानते है कि उनका परिवार मूल रुप से राजस्थान का ही था लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा शहर से 16 किलोमीटर की दूरी पर आदिवासी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी अंतर्राज्यीय बहुउद्देश्यीय परियोजना माही बजाज सागर बांध का नाम राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज के नाम पर रखा गया है। माही नदी पर बने इस बांध का निर्माण राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के अथक प्रयासों से 1972 और 1983 के मध्य पनबिजली उत्पादन और पानी की आपूर्ति के उद्देश्य से किया गया था। इसके निर्माण के लिए तीन राज्यों राजस्थान,गुजरात और मध्य प्रदेश के मध्य समझोता हुआ था।

यह बांध राजस्थान का सबसे लंबा और दूसरा सबसे बड़ा बांध है जोकि 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई के साथ ही बड़ी मात्रा में हाईडल बिजली का उत्पादन कर इस आदिवासी अंचल के लिए एक गेम चेंजर की भूमिका निभा रहा है। राहुल बजाज के दादा जमनालाल कनीराम बजाज (4 नवंबर 1889 – 11 फरवरी 1942) भी एक जाने माने उद्योगपति के साथ महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे।। वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करीबी और उनके प्रिय सहयोगी भी थे । राहुल बजाज का पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ, जिनके बारे में कहा जाता था कि जमनालाल बजाज गाँधी जी के पांचवें पुत्र थे।उनके पिता कमलनयन कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे, जो बाद में इंदिरा गांधी से अलग हो गए।

राहुल बजाज का राजस्थान के सीकर जिले के काशी का बास से गहरा रिश्ता रहा। उनका पैतृक गांव काशी का बास ही है। शेखावाटी के लाल राहुल बजाज का शनिवार को पुणे में निधन होने पर काशी का बास गांव में हर कोई दुखी है।83 साल के बजाज लंबे वक्त से कैंसर से पीड़ित थे और पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे।

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