उदयपुर : रूस में मृत खेरवाड़ा के गोड़वा के रहने वाले हितेंद्र गरासिया का शव पिछले पांच माह से भारत नहीं आने पाने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने रूस की सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गरासिया की पत्नी आशा देवी और बेटी उर्वशी की ओर से हाईकोर्ट में एडवोकेट सुनील पुरोहित की याचिका पर बुधवार सुबह जज दिनेश मेहता ने सुनवाई की। हाईकोर्ट द्वारा किसी विदेशी सरकार को नोटिस जारी करने को देश की न्यायपालिका के इतिहास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस दौरान भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आरपी रस्तोगी ने यह जवाब दिया कि रूस की सरकार ने अब तक भारतीय नागरिक के शव की फॉरेंसिक जांच पूरी नहीं की है। इसलिए कार्यवाही नहीं हो पा रही है। रूस जैसे विकसित तकनीक वाले देश में मृत्यु के पांच माह बाद भी एक डेड बॉडी की फॉरेंसिक जांच पूरी नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए आगामी 20 दिसंबर को भारत में रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को नोटिस जारी कर रूस की सरकार से जवाब मांगा है।

इस मामले में 7 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए इसे बेहद संवेदनशील मामला बताया था। साथ ही एक ग्रामीण आदिवासी महिला के अपने पति के शव के लिए इधर उधर भटकने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए भारत सरकार को हितेंद्र गरासिया के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के निर्देश दिए थे।
17 जुलाई को रूस में हुई थी मृत्यु
बता दें कि हितेंद्र गरासिया की 17 जुलाई 2021 को रूस में मृत्यु हो गई थी। जौ नौकरी के लिए गया था। हितेंद्र शव को भारत लाने के मामले में जब भारतीय दूतावास ने काफी समय तक कोई ध्यान नहीं दिया। इस मामले में विदेश में संकटग्रस्त भारतीयों की सहायता के लिए कार्य करने वाले बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने राष्ट्रपति सचिवालय और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली में अधिकृत शिकायत दर्ज करवाई। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस मामले में विदेश मंत्रालय को कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं, 25 अक्टूबर को शर्मा की शिकायत पर मानव अधिकार आयोग ने भी केस दर्ज करते हुए भारत सरकार के विदेश सचिव को नोटिस जारी किया।
