दौसा: प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के अधिग्रहण की मंशा को लेकर देवस्थान विभाग द्वारा दिए गए नोटिस के बाद विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों व आसपास के गांवों के पंच-पटेलों द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराने के बाद अब धर्म के क्षेत्र के सबसे बड़े संगठन विश्व हिन्दू परिषद – विहिप व प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा भी बालाजी मंदिर के समर्थन में उतर आए हैं। विहिप नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा मंदिर के अधिग्रहण को लेकर की जा रही प्रक्रिया से पूरे हिन्दू समाज में रोष व्याप्त है। यदि जनभावनाओं को नजरअंदाज कर अधिग्रहण किया गया तो समाज मजबूरन आंदोलन पर उतारू होगा।
विहिप के केन्द्रीय मंत्री उमाशंकर शर्मा ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत किशोरपुरी महाराज के अंतिम संस्कार से पहले ही मंदिर की कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार द्वारा नोटिस दिया जाना षड्यंत्र को दर्शाता है। सरकार का यह मानना कि मेहंदीपुर बालाजी धाम परंपरागत स्थान नहीं है, लेकिन इसका निर्णय सरकार नहीं समाज को करना चाहिए। यहां बाल्यकाल से ही महंत द्वारा मंदिर की सेवा-पूजा की जा रही थी। इसके साथ ही यहां के ट्रस्ट द्वारा अनेक सेवा के कार्य होते रहे हैं, ऐसे में सरकार के निर्णय पर कई प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद इसका पुरजोर विरोध करती है। यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो पूरा समाज आंदोलन पर उतर जाएगा। विहिप के क्षेत्रीय मंत्री सुरेश उपाध्याय ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि विहिप अपनी स्थापना के समय से ही मंदिरों व संतों का विशेष तौर पर सम्मान करती आई है। परिषद का स्पष्ट मानना है कि देश में जितने भी मंदिर हैं, वे सरकार के अधिग्रहण में नहीं होकर हिंदू समाज व परंपरागत चली आ रही पुजारी परंपरा के अधीन ही होने चाहिए।
भाजपा करेगी विरोध
पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को अधिग्रहण करने की मंशा को किसी भी स्थिति में सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस भी स्तर पर विरोध की जरूरत पड़ेगी तो भाजपा द्वारा वह किया जाएगा।
मंदिरों का ही अधिग्रहण क्यों?
सरकार मंदिरों का अधिग्रहण ही क्यों करती है। मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च आदि का अधिग्रहण क्यों नहीं करती। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। इसके लिए चाहे हमें कुछ भी क्यो नही करना पड़े। हम विकास के पक्षधर हैं। हम चाहते हैं सरकार यहां का विकास करे, पूरे क्षेत्र साथ हैं। लेकिन अब मंदिर का अधिग्रहण बर्दाश्त नहीं होगा।

