जयपुर। राज्य विधानसभा में आज निम्बाराम प्रकरण और सत्ताधारी पार्टी के विधायक वेदप्रकाश सोलंकी को हनीट्रैप मामले में फंसाने के आरोपों को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। पक्ष-विपक्ष के सदस्य निम्बाराम प्रकरण में लेकर आपस में उलझ गए। दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी हुई। व्यवधान की स्थिति को देखते हुए सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा।
शून्यकाल में भाजपा के अभिनेष महर्षि ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि थानों तक में बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई हैं। दोषियों के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज नहीं होता। कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी के हनीट्रैप प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के विधायक को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ रही हैं। उसे जबरन कौन फंसा रहा हैं। ये जांच होनी चाहिए। महर्षि ने निम्बाराम प्रकरण को उठाते हुए कहा कि राष्ट्रवादी संगठनों पर अंगूली उठाई जा रही हैं। निम्बाराम बेदाग हैं और वे बरी होंगे, लेकिन सरकार की नियत उन्हें जबरन फंसाने की हैं। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों शिक्षामंत्री गोविंदसिंह डोटासरा, प्रतापसिंह खाचरियावास, शांति धारीवाल आदि ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि अगर वे बेदाग है तो छिपते क्यों घूम रहे हैं, सामने क्योंं नहीं आ रहे। दोनों पक्ष इस मसले को लेकर आपस में उलझ गए। इसे देखते हुए सभापति राजेन्द्र पारीक ने सदन की कार्रवाई कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू तो भाजपा के मदन दिलावर की ओर से शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर की गई टिप्पणी पर हंगामा खड़ा हो गया। इस टिप्पणी के लिए दिलावर को सदन में माफी मांगनी पड़ी तब जाकर शांति स्थापित हो पाई। दिलावर की टिप्पणी पर सभापति राजेंद्र पारीक ने कहा-जिस तरह की अमर्यादित टिप्पणी मदन दिलावर ने की।यह कतई क्षम्य नहीं है। यह संसदीय परंपरा में उचित नहीं कही जा सकती। सदन आपसे अपेक्षा करता है।आप इसके लिए माफी मांगे। आपके माफी मांगने से गरिमा घटेगी नहीं बल्कि सदन की गरिमा बढ़ेगी। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी कहा कि मैं इसे लेकर दुखी हूं। शब्दों का चयन संयम के साथ करना चाहिए। इस पर मदन दिलावर ने कहा-मेरी मंशा ऐसी टिप्पणी की नहीं थी, लेकिन निंबाराम जी के लिए जो शब्द कहे गए वे निंदनीय है। इस पर सभापति राजेंद्र पारीक ने टोका और कहा, सीधे-सीधे माफी मांगी जाए। दिलावर बोले-यदि मेरे शब्दों से सदन को ठेस पहुंची है तो मैं इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। इसके बाद सभापति राजेंद्र पारीक ने निर्देश दिए कि सदन की कार्यवाही से शब्दों को निकाला जाए। यूट्यूब से भी इसे हटाया जाए।
