कोटा : जिले में धारा-144 लगाने के मामले को लेकर मामला गरमाता देखकर कोटा जिला प्रशासन भी बैकफुट पर आ गया है। धारा-144 लगाने जाने के संबंध में कोटा जिला प्रशासन ने अपनी सफाई में ट्वीट किया है। जिला प्रशासन ने ट्वीट जारी कर लिखा कि 21 मार्च को जारी धारा-144 में ‘The Kashmir Files’ फिल्म के कोटा जिले के सिनेमा घरों मे प्रदर्शन/संचालन अथवा घरों में देखने पर किसी भी प्रकार की कोई मनाही नहीं है।

इसी मामले को लेकर फिल्म ‘The Kashmir Files’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सीएम अशोक गहलोत को ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘आतंकियों की ताकत सिर्फ इतनी है कि वो डर पैदा करते है। हम डर जाते है। ये आपके लिए न्याय का समय है।’ विवेक ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को भी ट्वीट किया है कि ‘अगर लोकतंत्र में फिल्म के प्रदर्शन पर तोड़फोड़ की जाती है तो हमें न्याय के बारे में सोचना पड़ेगा।’

तेजस्वी सूर्या ने भी गहलोत सरकार पर साधा निशाना
बीजेपी सांसद व भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट कर गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को कलेक्ट्रेट पर मार्च की चेतावनी दी है। सूर्या ने ट्वीट किया कि आज युवा मोर्चा का प्रतिनिधि मंडल आज कलेक्टर से मुलाकात करके आदेश वापस लेने की मांग करेगा। आदेश वापस नहीं लेने पर युवामोर्चा प्रदेश अध्यक्ष के साथ बुधवार को वो खुद कलेक्ट्रेट पर मार्च करेंगे।

कलेक्टर से आदेश वापस लेने की मांग करेगा डेलिगेशन
मामले को लेकर युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु शर्मा ने बताया कि युवामोर्चा का डेलिगेशन कलेक्टर से आदेश वापस लेने की मांग करेगा। यदि धारा 144 हटाने के आदेश वापस नहीं होते तो कल कलेक्ट्रेट पर मार्च किया जाएगा। कलेक्ट्रेट मार्च में युवामोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या भी शामिल होंगे। इससे पहले बीजेपी नेता व पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला था। गुंजल ने कहा था कि सरकार जबरन मुकदमें दर्ज कर डराना चाहती है।
आपको बता दें कोटा कलेक्टर ने आदेश जारी कर जिले में 22 मार्च सुबह 6 बजे से 21 अप्रैल रात 12 बजे (1 माह) के लिए धारा 144 लागू की है। आदेश में धारा 144 लागू करने के तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं। इसमें आगामी दिनों में आ रहे त्योहार जैसे चेटीचंड, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, वैशाखी जमातुलविदा आदि, सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘The Kashmir Files’ और नहरों में जल जनित हादसों के बाद उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति कारण यह निर्णय लिया था।
