जयपुर। रीट पेपर लीक प्रकरण में रोज नया किस्सा सामने आ रहा है। राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने रीट मामले में एसओजी को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रीट पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए। इस प्रकरण में एसओजी के कर्मचारी और अधिकारी तक लिप्त हैं। इससे जांच प्रभावित हो रही है और कई अपराधियों को पकड़ा नहीं जा रहा है।
धारीवाल ने सदन को किया गुमराह
इसके अलावा किरोड़ी मीणा ने आरोप लगाया कि मंत्री शांति धारीवाल ने सदन को गुमराह किया है। किरोड़ी ने कहा कि पेपर लीक की बहस के दौरान राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद कटारिया ने पूछा कि डॉ प्रदीप पाराशर के अधीन चार डिप्टी कंट्रोलर को किसके आदेश से लगाया गया। इस पर मंत्री शांति धारीवाल ने जवाब दिया कि जिला कलक्टर जयपुर अतरसिंह नेहरा के आदेश पर चार लोग लगाए गए। जबकि हकीकत है कि चारों लोगों का आदेश सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है। ये चार डॉक्टर ध्यानचंद गोठवाल, डॉक्टर बी.एस. परमार, डॉक्टर सुभाष यादव और डॉ रणधीर सिंह है। आरोप लगाया कि इन्हीं चारों ने पेपर लीक किया है। सांसद मीणा ने आरोप लगाया कि इन चार लोगों के अलावा प्रदीप पाराशर तीन निजी रामकृपाल मीणा दो निजी लोग हैं। इनसे 20 -20 पेपर के छोटे लिफाफे पकड़ाए।
पूछताछ हो तो खुलेगी एसओजी की पोल
मीणा ने कहा है कि अगर अब तक गिरफ्तार किए गए चार लोगों को एसओजी आमने-सामने बैठा कर पूछताछ करें तो एसओजी के किन- किन लोगों ने पेपर लीक गैंग से मिलकर पेपर लीक करवाया सच्चाई सामने आ जाएगी। मीणा ने आरोप लगाया कि जब एसअेाजी की जो टीम जांच कर रही है । वही पेपर लीक करने में शामिल है तो एसओजी से कैसे निष्पक्ष जांच की आशा की जा सकती है। ऐसे में सीबीआई होनी चाहिए।
