जयपुर। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली जाते-जाते राजस्थान भाजपा नेताओं को दो टूक कह गए कि एकजुटता से पार्टी फोरम पर काम करों। गुटबाजी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शाह ने 1952 के जमीदारी प्रथा उन्मूलन के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी के रहने या ना रहने से पार्टी पर कोई असर नहीं पडऩे वाला। सिद्धांतों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।
गृहमंत्री ने प्रदेश भाजपा कौर कमेटी के सदस्यों से चाय पर चर्चा करते हुए कहा कि 1952 में आठ में से 6 विधायक जमीदारी प्रथा उन्मूलन के खिलाफ पार्टी छोड़ गए थे तब भी कोई असर नहीं पड़ा। तब दीनदयाल जी ने साफ कहा था कि एक विधायक भी नहीं रहे तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता पर पार्टी अपने सिद्धांतों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगी। उस समय छह विधायको के पार्टी का साथ छोड़ देने के कारण पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत (दांता रामगढ़) व एक अन्य सदस्य जगतसिंह झाला (बड़ीा सादड़ी़) ही जनसंघ में रह गए थे। शाह का इशारा प्रदेश भाजपा में गुटबाजी को लेकर था। शाह ने संगठन के कामकाज की सराहना करते हुए इस बात को भी दोहराया कि 2023 में विधानसभा का चुनाव नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। ये थे इस्तीफा देने वाले विधायक- आरएस दिलीप सिंह, केशरीसिंह, लालसिंह शक्तावत, प्रतापसिंह, संग्राम सिंह व विजयसिंह।
अमित शाह से पन्द्रह मिनट की चाय पर इस चर्चा में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव को छोड़ बाकी सभी सदस्य भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया, भाजपा के प्रभारी महामंत्री अरूणसिंह, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर आदि मौजूद थे।
हालाँकि शाह ने जन प्रतिनिधि सम्मेलन के खुले मंच से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल की प्रशंसा की। वे जैसलमेर से अपने साथ केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत को साथ लेकर आए थे लेकिन शाह ओर शेखावत की एकसाथ यात्रा को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। शेखावत का नाम पहले भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चाओं में रहा हैं। शाह के साथ जैसलमेर व जयपुर दौरे से शेखावत फिर सुर्खियों में आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्दसिंह डोटासरा ने भी शेखावत को भाजपा का सीएम चेहरा बताते हुए बयान जारी कर इस चर्चा को और हवा दे दी, लेकिन 2023 विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत मिल जाने के बाद मोदी-शाह की जोड़ी किस नाम पर मुहर लगाए, इसको अभी से भांप पाना भाजपा के शीर्ष नेताओं तक की समझ से भी परे हैं। शाह से अलग से गुफ्तगु की भाजपा कौर कमेटी नेताओं की तैयारी भी धरी की धरी रह गई।

