जयपुर। समुद्री मार्गों से आने वाले आंतकवादियों,तश्करो और समुद्री लुटेरोंं का मुस्तैदी के साथ डटकर मुकाबला करने हरदम तत्पर रहने वाले नेवी के कई जाबांज भी प्रथम प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा(RAS) में चयनित होकर आए हैं। अब वे बंदूक की जगह “कलम” चलाकर राज्य और राष्ट्रहित में काम करेंगे।
नेवी के जाबांज ने प्रथम प्रयास में की सफलता हासिल
इनमें एक नेवी का बहादुर सिपाही प्रमोद कुमार शर्मा भी हैँ जिसने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। शर्मा ने एक्स सर्विसमैन के लिए रिर्जव कोटेें में 60वीं रैंक हासिल की हैं,हालांकि, शर्मा की तमन्ना सभी श्रेणियों के दस टॉपरों में आने की है जो इस बार पूरी नहीं हो पाई। हालांकि प्रथम प्रयास में इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल हैं।
मां और पत्नी का था सपना
मूलत:चूरू के रहने वाले तथा वर्तमान में जयपुर में निवासरत प्रमोद कुमार शर्मा नेवी से रिटायर्ड होने के बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा(RAS) की तैयारी में जुट गए। नौकरी के अवसर तो रेल्वे पुलिस व एयरफोर्स में भी मिले पर नेवी को चुना और रिटायरमेंट के बाद मिशन प्रशासनिक सेवा में जाने का शुरू हो गया,क्योंकि प्रमोद ने मां तारादेवी और पत्नी प्रीति से अफसर बनने का वादा जो किया था। बच्चें विराट व वान्या भी पापा को अफसर के रूप में देखना चाहते थे।
नेवी में तैनाती के साथ की अपनी आगे की पढ़ाई
प्रमोद का अभावों और संघर्षों से शुरू से ही वास्ता रहा हैं। अत: 12वीं उत्तीर्ण करते ही नेवी ज्वाइन कर ली, ताकि देश सेवा के साथ घर वालों का सहारा बन सके। प्रमोद ने इसी कारण आगे की पढ़ाई भी नेवी में रहते हुए पूरी की। हार्डवर्क वाली नेवी की नौकरी और उसके साथ पढ़ाई करना बहुत ही दुरूह कार्य है पर प्रमोद की दृढ़इच्छा शक्ति से सबकुछ संभव हुआ।
एसडीएम बनने का सपना
प्रमोद कुमार ने इसी दृढ़इच्छा शक्ति से RAS परीक्षा को फाइट किया। RAS मैन में पास होते ही प्रमोद शर्मा को ये तो विश्वास था कि इस सेवा में हर हाल में नौकरी तो पा ही लेंगे,लेकिन प्रथम प्रयास में सीधे एसडीएम बनने का सपना अधूरा रह गया। वे कहते है कि समय की नियति का चक्र सही चला तो वे अधिनस्थ प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी एसडीएम बनने के सपने को भी पूरा कर ही लेंगे।
नेवी में मिला कई युद्धाभ्यासों में भाग लेने का अवसर
उनके इसी जज्बे ने नेवी में उन्हें सम्मान दिलवाया। वे पीटी ऑफिसर रैंक से सेवानिवृत हुए। नेवी की सेवा में रहते हुए प्रमोद शर्मा को विभिन्न अभियानों में श्रीलंका,बांग्लादेश, ओमान, फ्रंास के दौरे का सुअवसर और वहां युद्धाभ्यासों में शामिल होने का मौका मिला। उन्हें गर्व है कि वे सोमालियन पाइरेट्स अभियान का भी हिस्सा रहे। प्रमोद को नेवी में इन्हीं उत्कृष्ट सेवाओं का इनाम भी मिला और उन्हें चीफ ऑफ नेवल स्टॉफ मेडल से सम्मानित किया गया।
पत्नी व बहन पुलिस सेवा में
समुद्री तूफानों के थपेड़े खा-खा कर अपने-आपको मजबूत बनाने वाले प्रमोद एसडीएम बनने की अपनी दिली तमन्ना पूरी कर ही लेंगे ऐसा उनके जज्बे को देख विश्वास हैं। राष्ट्र सेवा और कानून से वास्ता रखने वाले प्रमोद की पत्नी प्रीति पुलिस कमिश्नरेट में सेवारत हैं तो बहन अनीता (नीतू) जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात हैं। उनकी सरकारी सेवा ने भी रिटार्यडमेंट के बाद फिर से सरकारी सेवा में जाने की संंकल्पशक्ति को दोगुना कर दिया। एक संयोग ही है कि दादा सुगनचंद शर्मा ने भी पत्रकारिता की जीवनयात्रा से पहले पुलिस में ही सेवाएं दी।
चाणक्य परिवार का भी आभार
प्रमोद ने अपनी इस सफलता का श्रेय परिजनों के साथ चाणक्य परिवार को भी दिया है जिन्होंने मॉक इन्टरव्यूह के माध्यम से टिप्स दिए। स्टेडी सामग्री उपलब्ध करवाई। चाणक्य परिवार से कई प्रशासनिक अधिकारी जुड़े हुए हैं जिन्होंने अपनी नि:शुल्क सेवाएं दी।



