जयपुर। मानो संघर्ष ही हमारा नारा है। NTT शिक्षकों की कुछ ऐसी ही कहानी हैं। पहले तो सरकार ने इस डिग्री के तहत भर्ती से ही साफ इन्कार कर दिया था। उसके लिए लम्बा आंदोलन किया,नेताओं को घेरा और लाठियां खाई तब जाकर 9 साल पहले 2012 में इनकी पहली भर्ती तो हो गई,लेकिन सेवा नियम ही नहीं बने तो ये जस के तस अटके पड़े हैं। पदोन्नति की राह तो दूर की कोड़ी इन पर जूनियर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। तीन बार पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक पद (एन टी टी द्विवर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता पर आधारित) की भर्ती हो चुकी पर सेवा नियम नहीं बनने से समान योग्यता वाले दूसरे शिक्षकों से ग्रेड पे भी कम दिया जा रहा हैं।
अपनी इन्हीं मांगों को लेकर ये शिक्षक फिर से आंदोलनरत हैं। कोविड काल होने के कारण कभी ट्वीटर पर तथा कभी सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने में लगे हैं। सबसे मजेदार बात तो यह है कि इन पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति आंगनबाड़ी में बच्चों को नर्सरी शिक्षा देने के लिए हुई थी,लेकिन विभाग इस मकसद से ही भटक रहा हैं।
सेवा नियम के अभाव में गम्भीर विसंगतियों का शिकार हो रहे आंगनबाड़ी में कार्यरत इन शिक्षकों का कहना है कि द्विवर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण(पूर्व प्राथमिक शिक्षा) की योग्यता पर आधारित इस पद का सृजन/भर्ती मुख्यमंत्री द्वारा बजट घोषणा 2011-12 में प्रथम बार किया गया था। नौ वर्षों से अधिक समय से इस पद पर कार्यरत शिक्षकों को अनेकों गम्भीर विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है।
वेतन शृंखला- इस पद पर वेतन शृंखला ग्रेड पे-2400 तदनुसार पे मेट्रिक्स L-5 के अनुसार दी जा रही है जबकि इनके पूर्णत: समान योग्यता पर आधारित तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-प्रथम को ग्रेड पे-3600 तदनुसार पे मेट्रिक्स L-10 के अनुसार दी जा रही है। दोनों की समान योग्यता, (बारहवीं उत्तीर्ण तथा द्विवर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण) है। अन्य राज्यों में भी इस पद पर पूर्णत: समान वेतन शृंखला देय है। चंडीगढ व दिल्ली में तो 4200 ग्रेड पे दी जा रही हैं।
पदोन्नति- राज्य में शिक्षक के सभी पदों से पदोन्नति का प्रावधान है जबकि इन शिक्षकों के लिए पदोन्नति का कोई प्रावधान ही नहीं किया गया है।
सेवा नियम- इस पद के सेवा नियमों का निर्धारण नहीं हो सका है। शिक्षक पद के सेवा नियमों के अनुरूप सेवा नियम नहीं होने के कारण इन्हें अन्य ग़ैर शैक्षिक कार्यों में लगाते हुए शोषण किया जा रहा है। तथा अवकाश भी शिक्षकों के अनुरूप दिए जाने का प्रावधान नहीं है।
TSP क्षेत्र से स्थानांतरण- प्रथम बार पद सृजन TSP क्षेत्र के लिए होने के कारण वहाँ अन्य जिलों के अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। बाद में अन्य जिलो के लिए पद सृजन के निर्णय के बाद भी मजबूरी में वहाँ सेवारत शिक्षकों के स्थानांतरण का प्रावधान नहीं किया गया है। इन समस्याओं के समाधाान का तो सरकार भरोसा देती हैँ,लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया। इन शिक्षकों को पढ़ाने के कार्य से हटाकर विभिन्न ग़ैर शैक्षिक कार्यों में भी लगाया जा रहा है जिससे इन शिक्षकों में रोष हैं।

